नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
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मध्य प्रदेश कांग्रेस में उज्जैन के वीर भारत न्यास जमीन विवाद को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सरकारी आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं और संगठन में डैमेज कंट्रोल की चर्चा तेज है।
पीएसी बैठक में भी गूंजा था विवाद
एक दिन पहले हुई कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की बैठक में भी दिग्विजय सिंह के उस बयान पर सवाल उठे, जिसमें उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के जमीन आवंटन संबंधी आरोपों से अलग राय रखी थी। बैठक में कई नेताओं ने सार्वजनिक मंच से अलग-अलग बयान देने पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे पार्टी की लड़ाई कमजोर होती है।
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तीन दिन तक टीवी डिबेट और बाइट से दूरी
प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कमले द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि अगले तीन दिनों तक पार्टी के अधिकृत नेता, प्रवक्ता और प्रतिनिधि किसी भी टीवी डिबेट में शामिल नहीं होंगे। अधिकृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोई आधिकारिक बयान भी नहीं दिया जाएगा। यह निर्देश प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और मोर्चा-प्रकोष्ठों तक भेज दिया गया है।
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जमीन विवाद से बढ़ी अंदरूनी सियासत
उज्जैन भूमि मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर लगातार हमलावर है, लेकिन इसी मुद्दे पर पार्टी नेताओं के अलग-अलग बयानों ने संगठन के भीतर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बहिष्कार और दिग्विजय-सिंघार की मुलाकात ने इस पूरे घटनाक्रम को नई राजनीतिक दिशा दे दी है।