राजधानी भोपाल में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस लूट के साथ-साथ कॉन्ट्रेक्ट किलिंग के दृष्टिकोण से भी जांच कर रही है। वारदात के बाद लाखों रुपये के जेवर, नकदी और अग्रवाल का मोबाइल फोन लेकर भागा केयरटेकर वरुण कुमार अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पंजाब के नाभा शहर का रहने वाला आरोपी वरुण घटना के बाद से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पूर्व प्रशासनिक अधिकारी की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि मंगलवार रात हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वरुण सबसे पहले बीना पहुंचा और फिर वहां से उत्तर प्रदेश के आगरा चला गया। बीना में उसने कुछ देर के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अफसर का मोबाइल फोन चालू किया था, जिसे थोड़ी देर बाद उसने फिर बंद कर दिया। आगरा में आरोपी का एक दोस्त रहता है, जिसके साथ वह पहले काम कर चुका है। भोपाल पुलिस ने आरोपी के दोस्त को आगरा से हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ कर रही है।
पूछताछ के दौरान आरोपी के दोस्त ने पुलिस को बताया कि वरुण के पिता ने तीन शादियां की थीं, जिनमें से दो पत्नियों की मौत हो चुकी है। अपनी मां के निधन के बाद से आरोपी वरुण किसी भी व्यक्ति के संपर्क में नहीं रहता था। वह लोगों से दूरी बनाकर रखता था। पुलिस अब उसके पुराने नेटवर्क और संपर्क वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है। आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से हत्या की वारदात को अंजाम दिया और मौके से कीमती सामान समेटकर फरार हो गया। पुलिस की टीम आरोपी की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
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एक करोड़ रुपये का वित्तीय विवाद
इसी बीच पुलिस की तफ्तीश में मृतक राकेश अग्रवाल के करोड़ों रुपये के लेनदेन की बात भी उजागर हुई है। जांच में पता चला है कि उन्होंने अपने एक नजदीकी व्यक्ति को बड़ी रकम दी थी, जो वापस नहीं मिली थी। सेवानिवृत्त अधिकारी ने लगभग 11 माह पहले अपने परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। अजीत पाटनी पर एक कंपनी में निवेश करने और बेहतर रिटर्न देने का झांसा देकर किस्तों में करीब 1 करोड़ रुपये ठगने का आरोप था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अक्तूबर 2025 में अजीत पाटनी को गिरफ्तार किया था।
वर्तमान में यह मामला अदालत में विचाराधीन है। पुलिस अब कोर्ट की कार्रवाई, राकेश अग्रवाल की संभावित गवाही और इस पूरे प्रकरण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की नए सिरे से पड़ताल कर रही है। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के कई अन्य लोगों के साथ हुए वित्तीय लेनदेन की जानकारियां भी पुलिस को मिली हैं।
कॉन्ट्रेक्ट किलिंग की आशंका
पुलिस शुरुआत में इस वारदात को केवल लूटपाट से जोड़कर देख रही थी लेकिन घटनाक्रम की सूक्ष्म जांच के बाद कॉन्ट्रेक्ट किलिंग की आशंका गहरा गई है। आरोपी वरुण ने सेवानिवृत्त अधिकारी के घर पर महज दो दिन पहले ही केयरटेकर के रूप में नौकरी शुरू की थी। पुलिस का मानना है कि यदि आरोपी की मंशा सिर्फ लूट की होती तो वह कुछ दिन काम करके भरोसा जीत सकता था और फिर चोरी या लूट की वारदात को अंजाम दे सकता था। नौकरी के दूसरे ही दिन गला रेतकर हत्या करना और फिर जेवर व नकदी के साथ मोबाइल फोन लेकर भागना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि आरोपी अपने साथ मोबाइल फोन क्यों ले गया। क्या मोबाइल में ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्य या तथ्य मौजूद थे, जिन्हें नष्ट करने के निर्देश आरोपी को दिए गए थे? इन तमाम बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।