बता दें कि भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कीटनाशक संयंत्र से 2-3 दिसंबर 1984 की रात को मिथाइल आसोसाइनाइट गैस के रिसाव के कारण 15,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इस विषाक्त गैस के रिसाव के कारण पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे।
कोरोना महामारी से 102 गैस पीड़ितों ने गंवाई जान
प्रदेश सरकार ने बुधवार को बताया कि कोरोना वायरस की महामारी से भोपाल में 102 गैस पीड़ितों की मौत हो चुकी है। दो दिसंबर तक कोविड-19 से भोपाल जिले में 518 लोग दम तोड़ चुके हैं। भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास के निदेशक बसंत कुर्रे ने बताया कि इन 102 लोगों में से 69 लोगों की आयु 50 वर्ष से अधिक थी, जबकि शेष 33 लोगों की आयु 50 वर्ष से कम थी।
इस बीच, कुछ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने दावा किया है कि कोरोना वायरस के कारण अब तक 254 गैस प्रभावितों की मौत हो चुकी है। प्रदेश के स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक भोपाल जिले में संक्रमण से अब तक 518 लोगों की मौत हो चुकी है।
भोपाल गैस पीड़ितों के हित में काम करने वाले एनजीओ भोपाल ग्रुप फॉर इफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने दावा किया, हमने इन 518 मृतकों में से 450 के घरों का दौरा किया है। इन 450 लोगों में से 254 भोपाल गैस प्रभावित थे।