इस चर्चा सत्र के दौरान विमर्श, सरोकारी कवि सम्मेलन, कहानी का पाठ, चंबल पुस्तक प्रदर्शनी, नाटक-नौटंकी, लोकगीत आदि कार्यक्रम आयोजित होंगे। सीएलएफ की तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। चंबल परिवार जुड़े साथी चंबल अंचल के सातों जनपदों के सरोकारी रचनाकारों से मिल रहे हैं। उनकी चंबल पृष्ठभूमि पर लिखी प्रकाशित और अप्रकाशित रचनाएं पांडुलिपि संग्रहित कर रहे हैं और सीएलएफ के तीसरे आयोजन में शामिल होने का आग्रह कर रहे हैं। औरैया, इटावा, जालौन, भिंड, मुरैना और धौलपुर जिलों से सीएलएफ आने वाली अप्रकाशित सामग्री और पांडुलिपि को 'चंबल संग्रहालय' संरक्षित रखने के साथ प्रकाशित भी करेगा।
चंबल साहित्य उत्सव पोस्टर रिलीज के दौरान कस्बाई इतिहासकार देवेन्द्र सिंह चौहान, कवियत्री और शिक्षिका डॉ. कमला नरवरिया, डॉ. कमल कुमार कुशवाहा, चन्द्रोदय सिंह चौहान, गजेंद्र सिंह एडवोकेट, डॉ. अनीता बंसल, प्राचार्य प्रोफेसर मालवीय विमल और विक्रम सिंह कुशवाहा आदि ने इस अवसर पर अपनी बात रखी।