फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Betul News: 14 वर्षीय दिव्यांग बच्ची की नाक में मिले लार्वा, डॉक्टरों ने सात दिन तक इलाज कर निकाले कीड़े

Sun, 29 Mar 2026 07:59 PM IST
बैतूल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल

सार

बैतूल में 14 वर्षीय दिव्यांग बच्ची की नाक में ‘नैजल मायोसिस’ संक्रमण मिला, जिसमें लार्वा पाए गए। डॉक्टर ऋषि माहोर की टीम ने एंडोस्कोपिक उपचार से कई दिनों में लार्वा निकालकर बच्ची की जान बचाई। समय पर इलाज से गंभीर खतरा टल गया। 
विज्ञापन
14 वर्षीय दिव्यांग बच्ची का इलाज किया गया। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बैतूल जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 14 साल की दिव्यांग बच्ची की नाक के भीतर लार्वा (कीड़े) पाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज नहीं किया जाता, तो संक्रमण दिमाग तक पहुंच सकता था और स्थिति जानलेवा बन सकती थी। फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है।

विज्ञापन

परिजनों के अनुसार बच्ची पिछले करीब एक महीने से सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्या से परेशान थी। शुरुआत में इसे सामान्य बीमारी समझा गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी नाक से तेज बदबू आने लगी और वह बेहद सुस्त रहने लगी। बच्ची बोलने में असमर्थ थी, इसलिए वह अपनी परेशानी स्पष्ट रूप से बता भी नहीं पा रही थी।

परिवार उसे जांच के लिए एक निजी अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने नाक के अंदर जीवित लार्वा होने की आशंका जताई। इसके बाद तुरंत बच्ची को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टर ऋषि माहोर की देखरेख में बच्ची का इलाज शुरू किया गया। एंडोस्कोपिक तकनीक की मदद से करीब 5 से 7 दिनों तक लगातार उपचार किया गया। इस दौरान प्रतिदिन नाक के भीतर से लगभग 5 से 10 लार्वा निकाले गए। डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण के कारण नाक के अंदर काफी क्षति हो चुकी थी, लेकिन समय पर उपचार मिलने से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- भारत में जन्मी पहली चीता मुखी हुई तीन साल की, सीएम बोले- प्रोजेक्ट की सफलता का सशक्त प्रतीक

डॉक्टरों ने बताया कि यह बीमारी ‘नैजल मायोसिस’ कहलाती है। यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर संक्रमण है, जिसमें मक्खियां नाक या किसी घाव में अंडे दे देती हैं। इन अंडों से निकलने वाले लार्वा शरीर के अंदरूनी ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और संक्रमण आगे बढ़कर साइनस के जरिए आंखों या दिमाग तक भी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दिव्यांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ या लंबे समय से संक्रमण से जूझ रहे लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है, खासकर जहां साफ-सफाई की कमी हो।
विज्ञापन


डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि नाक से बदबू आना, खून या मवाद निकलना, नाक में कुछ रेंगने जैसा महसूस होना या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज से ऐसे गंभीर संक्रमण से बचा जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जिले में इस तरह का एंडोस्कोपिक उपचार पहली बार किया गया है, जिसमें बिना बड़ा चीरा लगाए नाक के अंदर से ही सर्जरी कर लार्वा निकाले गए। फिलहाल बच्ची खतरे से बाहर है और उसकी निगरानी की जा रही है। 

14 वर्षीय दिव्यांग बच्ची की नाक से एंडोस्कोपिक तकनीक से निकाला लार्वा

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें