परिवारों ने बताया कि उनके बच्चों निहाल धुर्वे (2 वर्ष) और कबीर यादव (3 वर्ष 11 माह) का इलाज परासिया के एक निजी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी से कराया गया था। सिरप के सेवन के बाद बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में दो मासूम बच्चों की मौत के मामले में प्रशासनिक जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। सोमवार को अधिकारियों की एक टीम मृतक बच्चों के परिजनों से उनके गांव पहुंचकर मिली और पूरी जानकारी जुटाई।
आमला एसडीएम शैलेंद्र बडोनिया और सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े ने अपनी टीम के साथ जामुन बिछुआ और कलमेश्वरा गांव जाकर माता-पिता से बातचीत की। दोनों ही परिवारों ने बताया कि उनके बच्चों निहाल धुर्वे (2 वर्ष) और कबीर यादव (3 वर्ष 11 माह) का इलाज परासिया के एक निजी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी से कराया गया था।
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परिजनों के अनुसार, डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयों में कोल्ड्रिफ सिरप भी शामिल था। सिरप के सेवन के बाद बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने परिजनों से दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन और बची हुई सिरप की शीशी अपने कब्जे में ली है। यह सैंपल जांच के लिए लैब भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है, अब प्रतिवेदन (रिपोर्ट) आने का इंतजार है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि मौत का कारण सिरप था या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण।
सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े ने बताया कि दोनों परिवारों से मिलकर विस्तृत जानकारी ली गई है। बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री, प्रिस्क्रिप्शन और दवा के सैंपल जब्त कर लिए गए हैं। जांच प्रतिवेदन आने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएगा। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि यदि दवा में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित डॉक्टर और कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।