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बड़वानी: महज 100 रुपए वापस मांगने पर बेरहमी से ले ली जान, कोर्ट ने तीन हत्यारों को सुनाई 10-10 साल की सजा

Thu, 10 Sep 2026 04:32 PM IST
बड़वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी

सार

सिर्फ 100 रुपए के लिए शुरू हुआ विवाद युवक की मौत पर जाकर थमा। बड़वानी के पाटी में मारपीट के इस मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
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पुलिस हिरासत में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले के पाटी में महज 100 रुपए वापस मांगने को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया। मामले में तीन युवकों ने एक व्यक्ति की लात-घूंसों से इतनी मारपीट की कि जिसके बाद उसकी मौत हो गई। मामले में अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

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न्यायालय विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटीज एक्ट), बड़वानी लीलाधर सोलंकी ने हत्या के मामले में मनीष, रणछोड़ और वीरेंद्र को धारा 105 बीएनएस के तहत दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। प्रशासन ने इस प्रकरण को जघन्य एवं सनसनीखेज मामलों में चिन्हित किया था।

100 रुपए वापस मांगने पर शुरू हुआ विवाद
उपनिदेशक अभियोजन महेश पटेल के अनुसार फरियादी किताराम ने पुलिस को बताया था कि 29 मार्च 2026 की रात करीब 12:30 बजे वह गंधावल रोड स्थित टंटनेश्वर महादेव मंदिर के सामने छबानिया के खेत में फुलसिंग के साथ पत्ते खेलने गया था। वहां मनीष, वीरेंद्र और रणछोड़ भी मौजूद थे।
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अभियोजन के अनुसार मनीष ने फुलसिंग से पत्ते खेलने के लिए 100 रुपए उधार मांगे थे। फुलसिंग ने उसे रुपए दे दिए। करीब एक घंटे बाद रात 1:30 बजे फुलसिंग ने मनीष से अपने 100 रुपए वापस मांगे। आरोप है कि मनीष ने रुपए लौटाने से इंकार कर दिया और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगा। इसके बाद मनीष, रणछोड़ और वीरेंद्र ने फुलसिंग के साथ लात-घूंसों से मारपीट की।

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घर ले जाने के बाद हुई मौत
अभियोजन के मुताबिक मौके पर मौजूद किताराम और लोकेश ने बीच-बचाव कर झगड़ा शांत कराया। मारपीट में फुलसिंग के शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई थीं और उसे दर्द हो रहा था। इसके बाद किताराम और लोकेश उसे लेकर घर पहुंचे। उन्होंने घटना की जानकारी काका मोहन को दी और फिर अपने घर चले गए।

सुबह करीब 4 बजे काका मोहन किताराम के घर पहुंचे और बताया कि फुलसिंग के सीने, पेट और मुंह में दर्द हो रहा है। इसके बाद जब वे फुलसिंग के पास पहुंचे तो वह मृत मिला। उसकी मौत की सूचना मिलने पर मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार मौके पर एकत्रित हो गए। इसके बाद गांव के पूर्व सरपंच सुरला सोलंकी, पांडिया सोलंकी और भाका सोलंकी को घटना की जानकारी दी गई। उन्हें साथ लेकर पाटी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
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अभियोजन की साक्ष्य के आधार पर फैसला
पाटी थाने में मामला दर्ज कर जांच पूरी की गई और न्यायालय में चालान पेश किया गया। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को धारा 105 बीएनएस के तहत दोषी पाया। अदालत ने मनीष, रणछोड़ और वीरेंद्र को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 25-25 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रकरण की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक जगदीश यादव ने पैरवी की।

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