फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़
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बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी सम्यक बोधि भंते उर्फ गुलाबराय गौतम को गिरोह के सरगना रियाल चौधरी से दान के रूप में कमीशन मिलता था। विशेष कार्य बल की जांच में खुलासा हुआ है कि डबरा क्षेत्र से छह अनुचित तरीके से प्रवेश करने वाले घुसपैठियों के दस्तावेज बनवाने में आरोपी ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया। प्रशासनिक सुस्ती के कारण केवल 96 घंटों के भीतर विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी कर दिए गए। गिरोह ने कोरोना काल के दौरान इस साजिश को अंजाम दिया।
फर्जी दस्तावेज बनवाने की साजिश
आरोपी करीब पांच साल तक आंबेडकर पार्क स्थित बौद्ध विहार का प्रमुख रहा। उसी समय रियाल चौधरी अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा था। आरोपी और उसके शिष्य गयाप्रसाद ने लिखित गवाही दी कि ये छह लोग स्थानीय निवासी हैं। प्रशासन ने बिना किसी जांच-पड़ताल के आधार कार्ड, मूल निवासी और जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिए। आरोपी अब सारा दोष रियाल चौधरी पर मढ़ रहा है, जबकि जांच टीम उसके बैंक खातों की जांच कर रही है। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद 70 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है।
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सिमरिया टेकरी में गुप्त ठिकाना
स्थानीय निवासियों के अनुसार कुछ समय पहले बौद्ध विहार में अज्ञात लोग आकर रुके थे। ग्रामीण उनकी भाषा समझने में असमर्थ थे और प्रशासन के पास उनकी कोई जानकारी नहीं थी। मास्टरमाइंड रियाल ने पूरे फर्जीवाड़े के लिए लॉकडाउन की अवधि को चुना। उसने स्थानीय प्रभाव वाले लोगों को पैसे का लालच देकर अपना मोहरा बनाया। अब सुरक्षा एजेंसियां गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटी हैं।
पासपोर्ट व्यवस्था में कड़े नियम
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया है। विदेश मंत्रालय के सहायक अधीक्षक कमल पाल के अनुसार कर्मचारियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। अब कर्मचारियों को बायोमीट्रिक उपस्थिति देने के बाद ही लॉगिन की अनुमति मिलेगी। तीन मिनट तक कोई गतिविधि न होने पर प्रणाली स्वचालित रूप से बंद हो जाएगी। आवेदन की जांच अब तीन बार की जाएगी और चौथी बार के लिए अलग शुल्क देना होगा। प्रणाली में विशेष अधिकारियों तथा संबंधित थाना प्रभारियों के संपर्क नंबर भी दर्ज किए गए हैं ताकि सत्यापन जल्दी हो सके।