मध्य प्रदेश के बालाघाट परसवाड़ा क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में बाघ की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों में भारी दहशत और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है। शनिवार सुबह तहसील मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर ग्राम लिंगा-पोंडी के बीच बाघ को घूमते हुए देखा गया। वहीं सिलगी कन्हार टोला में बाघ ने दो गायों का शिकार कर डाला। लगातार हो रहे हमलों और विभाग द्वारा अब तक रेस्क्यू न किए जाने के कारण ग्रामीण खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में करीब कई बाघों की मौजूदगी का अनुमान है, लेकिन वन विभाग इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
लगातार बढ़ रही हैं घटनाएं
ग्रामीणों के अनुसार, कन्हार टोला क्षेत्र में एक साथ दो बाघों को देखा गया है। रिहायशी इलाकों और आसपास के जंगलों को मिलाकर क्षेत्र में करीब कई बाघ सक्रिय होने का अनुमान है, हालांकि वन विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सेरपार में बैलों पर हमला
कुछ दिनों पहले सेरपार और खरपड़िया के बीच 'शक्ति घाट' के पास दो बैलों पर वन्यप्राणी ने हमला किया था। इसमें से एक बैल का शव मिला था, जबकि दूसरे की तलाश की जा रही है। भोरवाही के खेतों में आहट: इससे पूर्व परसवाड़ा के पास ग्राम भोरवाही के खेतों में भी बाघ देखा गया था, और सेरपार के नाले में बाघ के पदचिह्न मिले थे।
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आज मवेशी,कल इंसान का नंबर
ग्रामीणों की मांग लगातार हो रही घटनाओं से गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें खेती और अन्य रोजमर्रा के कामों के लिए रोज जंगल से सटे इलाकों में जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा, आज बाघ मवेशियों का शिकार कर रहा है, कल कहीं कोई इंसान इसकी चपेट में न आ जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि आबादी से सटे इलाकों में तत्काल रात के समय गश्त बढ़ाई जाए और केवल घटना होने के बाद मौके पर पहुंचने के बजाय विभाग पहले से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करे।
वन विभाग की कार्रवाई
लगाए गए सीसीटीवी कैमरे से पार की घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौका मुआयना किया था। हालांकि मवेशियों पर हमला बाघ ने किया है या तेंदुए ने, इसे लेकर साक्ष्यों के आधार पर संशय बना हुआ था। वन्य प्राणी की सटीक पहचान और उसकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए वन विभाग द्वारा घटनास्थल और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही, प्रभावित गांवों में एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।