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Balaghat News: जीएसटी मामले में दो फर्मों पर एंटी इवेजन ब्यूरो का छापा, भाजपा जिलाध्यक्ष से जुड़ा है एक नाम

Fri, 16 Jan 2026 10:18 PM IST
बालाघाट ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट

सार

गुरुवार देर रात जबलपुर एंटी इवेजन ब्यूरो ने एक साथ दो कंस्ट्रक्शन फर्मों पर छापा मारा। हर्ष कंस्ट्रक्शन का नाम पूर्व मंत्री एवं भाजपा जिलाध्यक्ष से जुड़ने के कारण यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मानी जा रही है।
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कार्रवाई करती टीम
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विस्तार
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जिले में गुरुवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब जबलपुर एंटी इवेजन ब्यूरो की दो टीमों ने एक साथ शहर की दो प्रमुख कंस्ट्रक्शन फर्मों पर दबिश दी। यह कार्रवाई हर्ष कंस्ट्रक्शन और वैनगंगा कंस्ट्रक्शन पर की गई, जहां जीएसटी से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।

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सूत्रों के मुताबिक हर्ष कंस्ट्रक्शन का नाम पूर्व मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी वजह से यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मानी जा रही है। वहीं वैनगंगा कंस्ट्रक्शन एक पार्टनरशिप फर्म है, जिसके वित्तीय लेनदेन और टैक्स रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।

एंटी इवेजन ब्यूरो की टीमें देर रात तक दोनों फर्मों के कार्यालयों में मौजूद रहीं। इस दौरान कंप्यूटर सिस्टम, बिल बुक, जीएसटी रिटर्न, इनवॉइस और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। कुछ अहम दस्तावेजों की फोटोकॉपी और डिजिटल डेटा भी सुरक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
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पूरी कार्रवाई का नेतृत्व अधिकारी रविंद्र सनोडिया और ब्रजेंद्र सिंह कर रहे हैं। दोनों अधिकारियों की सीधी निगरानी में दस्तावेजों की जांच की गई। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो रही है और फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

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जानकार सूत्रों का दावा है कि एंटी इवेजन ब्यूरो को टैक्स चोरी से जुड़े ठोस इनपुट मिलने के बाद ही यह कार्रवाई की गई। आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्यों में खर्च दिखाने, फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर अनियमितताएं हो सकती हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

सत्ताधारी दल से जुड़े नेता की फर्म पर कार्रवाई होने से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह जांच सिर्फ बालाघाट तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इससे जुड़े अन्य प्रोजेक्ट और फर्म भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

अधिकारियों ने अब तक संभावित टैक्स चोरी की राशि को लेकर कोई आंकड़ा साझा नहीं किया है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी और उसके बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना भी है। फिलहाल दोनों फर्मों पर अलग-अलग टीमों द्वारा जांच जारी है और पूरे मामले पर जिला प्रशासन से लेकर राज्य स्तर तक नजर बनी हुई है।

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