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Balaghat News: दस दिन में दो तेंदुओं की संदिग्ध मौत से कटघरे में वन विभाग, पीएम रिपोर्ट पर टिकी बड़ी सच्चाई

Thu, 08 Jan 2026 09:43 PM IST
बालाघाट ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाट

सार

दस दिनों के भीतर दो तेंदुओं की संदिग्ध मौतों ने वन विभाग की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी तरह पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जबकि रिपोर्ट में देरी से संदेह और गहराता जा रहा है।
 
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मृत तेंदुआ
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विस्तार
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जिले के जंगलों में लगातार हो रही वन्यजीवों की संदिग्ध मौतें अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा भी बनती जा रही हैं। 23 दिसंबर को उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता के जंगल में एक नर तेंदुआ मृत अवस्था में मिला था। प्रारंभिक जांच में उसके शरीर पर बाहरी चोट के स्पष्ट निशान नहीं दिखे लेकिन हालत संदिग्ध होने के कारण वन विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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इसी बीच 1 जनवरी को उत्तर सामान्य वनमंडल के दक्षिण लामता अंतर्गत मगदर्रा सर्किल से करीब एक किलोमीटर दूर खेत में एक मादा तेंदुआ मृत पाई गई। यह क्षेत्र जंगल से सटा हुआ है, जहां अक्सर तेंदुओं की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों ने जब खेत में तेंदुआ पड़ा देखा तो तुरंत वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा लेकिन अब तक दोनों मामलों की रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

वनमंडल अधिकारी रेशम सिंह धुर्वे के अनुसार दोनों तेंदुओं की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही संभव हो पाएगा। उन्होंने बताया कि नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है, जिसमें जहर, करंट, अंदरूनी चोट या किसी संक्रामक बीमारी की भी जांच की जा रही है। हालांकि रिपोर्ट में देरी को लेकर विभाग पर सवाल उठ रहे हैं।
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वन्यजीव प्रेमी अभय कोचर ने कहा कि बालाघाट में बड़ी संख्या में तेंदुए, बाघ और अन्य वन्यजीव असंरक्षित क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं। खेतों, गांवों और सड़क किनारे उनकी मौजूदगी आम होती जा रही है। ऐसे में अवैध करंट, जहर, फंदे और तेज रफ्तार वाहनों से टकराने जैसी घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

कोचर का आरोप है कि जिले में वन्यजीव प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है। कई बार गंभीर मामलों की जांच के लिए पेंच और कान्हा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई संभव नहीं हो पाती।

वन्यजीवों की असमय मौतों को लेकर अभय कोचर ने पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को लिखित शिकायत भेजी है। इसमें उन्होंने मांग की है कि बालाघाट में एक स्वतंत्र वन्यजीव जांच इकाई गठित की जाए, जो हर संदिग्ध मौत की वैज्ञानिक और समयबद्ध जांच करे। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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बालाघाट में इससे पहले भी कई मामलों में वन्यजीवों की मौत का रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है। कटंगी क्षेत्र में 12 दिसंबर को करंट से एक सब-एडल्ट बाघ की मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। घटना के बाद वन विभाग ने कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
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इसी तरह लालबर्रा परिक्षेत्र के सोनवानी अभयारण्य में बाघ की संदिग्ध मौत और शव को बिना तय प्रक्रिया के जलाने का मामला भी वन विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बनकर उभरा था। उस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक हुए लेकिन सच्चाई आज तक पूरी तरह सामने नहीं आई है।

लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बालाघाट के जंगलों में वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। अब इन दो तेंदुओं की मौत ने एक बार फिर प्रशासन और वन विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब पूरे जिले की नजरें पीएम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह बताएगी कि यह मौतें प्राकृतिक थीं या मानवीय लापरवाही और अपराध का नतीजा।

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