बालाघाट में पकड़े गए बाघ कंकाल बेचने वाले
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मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जिले में वन विभाग ने वन्यप्राणियों के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। मुखबिर की सटीक सूचना पर 21 जून 2026 को वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर एक सुनियोजित जाल बिछाया। टीम ने मौके पर दबिश देकर बाघ के दो संदिग्ध कंकालों के साथ पांच आरोपियों को हिरासत में लिया।
ग्राहक बनकर जाल में फंसाया
वन अधिकारियों को सूचना मिली थी कि तस्कर वन्यप्राणियों के अंगों की डील करने वाले हैं। योजना के तहत वनकर्मी खुद खरीदार बने और सौदा तय होते ही आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बरामद कंकालों को बाघ का होना बताया है। इनमें से एक कंकाल मंडला जिले के बम्हनी बंजर से लाया गया था, जबकि दूसरे कंकाल के स्रोत का पता लगाया जा रहा है। प्रथम दृष्टया ये हड्डियां बाघ की ही लग रही हैं, लेकिन सटीक पुष्टि के लिए इन्हें वैज्ञानिक परीक्षण (फॉरेंसिक जांच) हेतु लैब भेजा गया है।
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सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी
तस्करी के इस मामले में मंडला निवासी रामलाल टेकाम (52) व दशरथ परते (45) तथा बालाघाट के परसवाड़ा निवासी भीम सिंह, रविन्द्र सोनकुसरे और राजकुमार सोनकुसरे को गिरफ्तार किया गया है। वहीं छठे आरोपी देवी दयाल ढोढरे से कड़ी पूछताछ जारी है। वन विभाग वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत आरोपियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई कर रहा है। विभाग अब इस गिरोह के अंतरराज्यीय कनेक्शन और अन्य मददगारों की तलाश में जुटा है।