जिस बालाघाट इलाके में कुपोषण से 32 बच्चों की मौत हो गई थी, उसी जिले में पुलिस ने जाली दस्तावेज और फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर 17 वर्षों तक सरकारी सेवा देने वाले एक फर्जी डॉक्टर का पर्दाफाश किया है। आरोपी ने इस लंबी अवधि में चार पदोन्नति भी प्राप्त कीं।
बिरसा पुलिस ने राज्य स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस तफ्तीश में यह सनसनीखेज तथ्य उजागर हुआ कि आरोपी की डिग्री ही नहीं, बल्कि उसकी पूरी पहचान फर्जी थी।
वर्ष 2009 से सुनील सिंह के नाम से नौकरी करने वाले इस व्यक्ति का असली नाम शिवकुमार पांडे है, जो रीवा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। पुलिस प्रशासन ने आरोपी की गिरफ्तारी पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।
प्रणाली में सेंध लगाकर हासिल की पदोन्नति
वर्ष 2009 में आरोपी ने फर्जी दस्तावेज के सहारे स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम में प्रवेश पाया था। इसके पश्चात वर्ष 2012 में उसने संविदा व्यवस्था के तहत चिकित्सक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की। विभागीय सेवा के दौरान उसने चार बार पदोन्नति हासिल की और वर्ष 2023 में बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) का पद हासिल कर लिया। अनेक विभागीय जांचों और सत्यापन प्रक्रियाओं के बावजूद आरोपी प्रशासनिक तंत्र की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहा।
राज्य स्तरीय समिति की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर 10 अक्तूबर को बिरसा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार है।
वास्तविक चिकित्सक की पहचान चुराकर बनाई डिग्री
मामले की गहराई से छानबीन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी ने एक अन्य असली डॉक्टर की पहचान चुराकर फर्जी डिग्री तैयार कराई थी। देवास जिले में कार्यरत डॉक्टर सुनील कुमार और आरोपी फर्जी डॉक्टर के सभी शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह समान पाए गए। दोनों के दस्तावेज में नाम सुनील सिंह, पिता का नाम मोहन सिंह और जन्मतिथि एक फरवरी 1978 दर्ज थी।
इसके अतिरिक्त दोनों ही दस्तावेज में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा से एमबीबीएस पाठ्यक्रम उत्तीर्ण होना दर्शाया गया था। हालांकि, दोनों व्यक्ति एक-दूसरे से पूरी तरह अनजान थे। देवास में पदस्थ असली डॉक्टर सुनील कुमार ने तीन बार जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपनी मूल डिग्री की सत्यता प्रमाणित की। पूर्व में हुई एक विभागीय जांच के दौरान तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आरोपी को क्लीन चिट देकर बचा लिया था।
नाम भी फर्जी, असली नाम शिवकुमार पांडे
जब पुलिस टीम आरोपी को पकड़ने के लिए उसके गृह जिले रीवा पहुंची, तब उसकी वास्तविक पहचान शिवकुमार पांडे के रूप में उजागर हुई। आरोपी के सेवा अभिलेखों की पड़ताल में उसका गृह जिला कभी मुरैना, कभी रीवा तो कभी बालाघाट दर्ज मिला। मेडिकल काउंसिल की जांच में ज्ञात हुआ कि आरोपी के पास स्थायी पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था, केवल प्रोविजनल पंजीकरण के दस्तावेज जमा थे।
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यह सच सामने आते ही प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए। वर्तमान में 36 थानों की पुलिस टीम आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए अभियान चला रही है। पुलिस विभाग ने आरोपी के चित्र वाले पोस्टर विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा किए हैं। अधिकारियों ने आरोपी की सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को 10,000 रुपये की इनामी राशि देने की घोषणा की है। पुलिस ने दावा किया है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।