आयोग अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य के निर्देश पर तीन सदस्यीय दल ने प्रभावित गांवों का दौरा किया।
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बालाघाट जिले के बिरसा क्षेत्र में विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति के 24 बच्चों की खसरा, मलेरिया और अन्य बीमारियों से हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने जांच शुरू कर दी है। आयोग अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य के निर्देश पर तीन सदस्यीय दल ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। जांच दल में विधि सलाहकार प्रकाश कुमार उइके, डायरेक्टर पूर्णेंदुकांत और इन्वेस्टिगेटर शिवप्रकाश शामिल हैं।
प्रभावित गांवों का दौरा और निरीक्षण
जांच दल ने सोनगुड्डा, बोंदारी, कुंडेकसा, कोरका, गठिया और मछुरदा गांवों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र और जनजातीय छात्रावासों का निरीक्षण किया। दल के सदस्यों ने मृतक बच्चों के परिजनों से बीमारी, इलाज, टीकाकरण, पोषण और पेयजल आपूर्ति के संबंध में चर्चा कर जानकारी जुटाई। निरीक्षण के दौरान महाकौशल वनवासी विकास परिषद के जनजाति सहहित रक्षा प्रमुख लखन मेरावी भी टीम के साथ मौजूद रहे। उन्होंने ही आयोग को पत्र लिखकर बैगा गांवों में बच्चों की मौतों की जानकारी दी थी।
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लापरवाही और विभागीय भूमिका की जांच
दो दिन के निरीक्षण के बाद विधि सलाहकार प्रकाश कुमार उइके ने बताया कि आयोग बच्चों की असमय मौतों के हर पहलू की पड़ताल कर रहा है। मौतों के कारण का पता लगाने के लिए संबंधित विभागों से रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे गए हैं। उइके ने स्पष्ट किया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, मलेरिया तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका की जांच होगी कि आखिर किस स्तर पर चूक हुई। उन्होंने क्षेत्र में अशिक्षा और जागरूकता की कमी को भी मौतों का बड़ा कारण माना। योजनाओं के क्रियान्वयन में जनजातीय विभाग के समन्वय की भी पड़ताल की जाएगी।