फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Damoh: चारों विधानसभाओं के 57 प्रत्याशियों में से 48 की जमानत जब्त, जीजीपी के प्रत्याशी ही बचा पाए अपनी जमानत

Wed, 06 Dec 2023 11:06 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

Damoh: विधानसभा चुनाव की 3 दिसंबर को मतगणना संपन्न होने के बाद दमोह जिले की चारों विधानसभा में भाजपा ने अपना परचम लहरा दिया और चारों ही सीटों पर कब्जा कर लिया। इस विधानसभा चुनाव में दमोह जिले की चारों विधानसभाओं से 57 प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े थे, जिसमें से 48 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है।
विज्ञापन
चारों विधानसभाओं के 57 प्रत्याशियों में से 48 की जमानत जब्त - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दमोह जिले की चारों विधानसभाओं से 57 प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े थे, जिसमें से 48 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है। बता दें कि कांग्रेस के अलावा केवल जबेरा विधानसभा से गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विनोद राय ही अपनी जमानत बचा पाए हैं। उन्हें 55000 वोट मिले हैं।

विज्ञापन


सबसे बड़ी बात यह रही कि पथरिया विधानसभा से विधायक रही रामबाई सिंह परिहार जो इस विधानसभा में बीएसपी की ओर से दूसरी बार प्रत्याशी थी, वह भी अपनी जमानत नहीं बचा सकी और इस तरह से 48 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस छोड़ बीएसपी का दामन थामने वाले जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भगवान दास चौधरी भी हटा विधानसभा से चुनाव हारने के बाद अपनी जमानत नहीं बचा पाए। यह वह बड़े नेता है जिनके कयास लगाए जा रहे थे कि उनके चुनाव मैदान में खड़े होने से त्रिकोणीय संघर्ष होगा, लेकिन आखिर तक ऐसा नहीं हो पाया और यह प्रत्याशी चुनाव हारने के साथ ही अपनी जमानत भी जब्त करा बैठे।

1952 से 2023 तक 550 प्रत्याशियों को जमानत जब्त

यदि 1952 से लेकर 2023 तक हुए विधानसभा चुनाव का आंकड़ा देखा जाए तो कुल 693 प्रत्याशी अभी तक चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें से 550 प्रत्याशी अपनी जमानत जब्त करा चुके हैं। 

यह होती है जमानत राशि

विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार निर्वाचन अधिकारी के पास नामांकन दाखिल करते समय जमानत के रुप में एक निश्चित राशि जमा करनी पड़ती है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 34/1 ख के अनुसार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सामान्य उम्मीदवार को वर्तमान में जमानत के तौर पर 10 हजार रुपए की राशि तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए पांच हजार रुपए की राशि जमा करना पड़ती है।

कब होती है जमानत जब्त

विधानसभा चुनाव लड़ने वाला कोई उम्मीदवार अगर विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं की संख्या के 16 फीसदी मत भी प्राप्त नहीं कर पाता है। तो निर्वाचन आयोग में जमा की गई उसकी राशि को निर्वाचन आयोग जप्त कर लेता है, इसे जमानत जब्त होना कहा जाता है। उदाहरण के रूप में अगर किसी विधानसभा क्षेत्र में एक लाख मतदाता है तो उस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को 16 हजार से भी ज्यादा मत हासिल करने होंगे। अगर वह इतने मत हासिल नहीं कर सकता तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी और यदि वह इससे अधिक मत हासिल कर लेता है तो वह अपनी जमानत बचा लेता है और उसके द्वारा जमा की गई राशि उसे वापिस मिल जायेगी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें