एशिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी वत्सला का 100 से अधिक की उम्र में पन्ना टाइगर रिजर्व में निधन हो गया। केरल से लाई गई वत्सला को मध्य प्रदेश की भावना और जंगलों की मूक रक्षक कहा गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके निधन पर शोक जताया और श्रद्धांजलि दी।
स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण गई जान
कुछ समय से वत्सला के आगे के पैरों के नाखूनों में चोट थी, जिससे वह चल नहीं पा रही थी। वह हिनौता क्षेत्र के खैरैयान नाले के पास बैठ गई थी। वन विभाग की टीम ने उसे उठाने की बहुत कोशिश की, लेकिन दोपहर में उसने दम तोड़ दिया। उसकी आंखों की रोशनी भी जा चुकी थी और वह लंबी दूरी चलने में असमर्थ थी।
ये भी पढ़ें:- Maharashtra: एसयूवी से टक्कर में मोटरसाइकिल सवार की मौत, पुलिस ने कहा- भाजपा विधायक का बेटा चला रहा था कार
विशेष देखभाल के कारण लंबी उम्र
वत्सला को हिनौता एलीफेंट कैंप में रखा गया था और प्रतिदिन खैरैयान नाले में नहलाया जाता था। उसे विशेष भोजन, जैसे कि खिचड़ी, दी जाती थी। डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की नियमित निगरानी और देखभाल के चलते उसने इतने लंबे समय तक जीवन जिया।