फर्जी IAS और मध्य प्रदेश टूरिज्म अधिकारी बनकर ठगी करने वाली तृप्ति राजपूत के भोपाल कनेक्शन की जांच में पुलिस ने घर और ससुराल पर छापा मारा। फर्जी CBI कार्ड, लेटरहेड और सरकारी कार मिली। दो आरोपी फरार हैं।
खुद को IAS और मध्य प्रदेश टूरिज्म की बड़ी अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाली तृप्ति राजपूत की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। चंदेरी पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए उसके भोपाल कनेक्शन की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच के सिलसिले में पुलिस तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को भोपाल लेकर पहुंची। यहां बागमुगालिया स्थित उसके घर और अल्कापुरी स्थित ससुराल में तलाशी ली गई।
सूत्रों के अनुसार, तलाशी के दौरान पुलिस को घर से फर्जी CBI पहचान पत्र, लेटरहेड और ठगी से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा एक सफेद इनोवा कार भी पुलिस की जांच के घेरे में है। कार पर आगे और पीछे ‘भारत सरकार’ लिखा हुआ था। पुलिस को आशंका है कि आरोपी इस कार का इस्तेमाल खुद को बड़ा सरकारी अधिकारी बताने और लोगों पर रौब जमाने के लिए करती थी।
पूरा मामला अशोकनगर जिले के चंदेरी का है। तृप्ति अपने भाई के साथ चंदेरी के किला कोठी होटल में ठहरी थी। यहां उसने खुद को मध्य प्रदेश टूरिज्म की एडिशनल हेड और IAS अधिकारी बताया। होटल में उसकी मुलाकात स्थानीय युवकों से हुई। आरोप है कि उसने युवकों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में मोटी सैलरी वाली सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
पीड़ितों में चंदेरी निवासी जयकुमार कोली, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी शामिल हैं। आरोपियों ने प्रत्येक से नौकरी दिलाने के नाम पर तीन-तीन लाख रुपये मांगे। चारों युवकों ने भरोसे में आकर किला कोठी होटल में ही 9 लाख 80 हजार रुपये नकद दे दिए और अपने दस्तावेज भी सौंप दिए। बाकी दो लाख रुपये नौकरी लगने के बाद देने की बात तय हुई थी।
काफी समय बीतने के बाद जब न नौकरी मिली और न पैसे वापस किए गए तो युवकों को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने चंदेरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को होटल से गिरफ्तार कर लिया।
जांच में तृप्ति से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि उसने खुद को IAS अधिकारी बताकर एक कारोबारी से नजदीकी बढ़ाई और उससे शादी भी कर ली। बाद में कारोबारी से भी ठगी किए जाने का आरोप है। पुलिस अब उसके वैवाहिक और पारिवारिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, तृप्ति महंगे आईफोन, लग्जरी कपड़े और सरकारी गाड़ी जैसी दिखने वाली इनोवा के जरिए लोगों के बीच अपनी हाई-प्रोफाइल छवि बनाती थी। फर्जी लेटरहेड और CBI कार्ड दिखाकर वह लोगों को अपने सरकारी अधिकारी होने का भरोसा दिलाती थी। उसके पास से मिले दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
मामले में दो अन्य आरोपी तनुज बैश्य और अंजली सिंह अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने चंदेरी के अलावा भोपाल और अन्य जिलों में भी लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की हो सकती है। पुलिस अब पुराने मामलों को भी खंगाल रही है।