बलात्कार के आरोप में सजा काट रहे आसाराम ने इंदौर में 20 साल पहले एक रुपये लीज पर 100 करोड़ की जमीन ली थी। सितंबर 2013 में पता चला कि इस जमीन को लेते वक्त लीज शर्तों का उल्लंघन किया गया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने जमीन वापस पाने के लिए कार्रवाई भी शरू कर दी थी। लेकिन अभी तक वह जमीन वापस नहीं ले पाया है। जिसका कारण है आश्रम द्वारा प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट से स्टे लेना। इसके अलावा अधिकारियों ने भी जमीन वापस लेने के लिए कोई खास कोशिश नहीं की।
अब जबकि आसाराम को उम्रकैद की सजा सुना दी गई है, तब भी प्रशासन जमीन पर लगा स्टे नहीं हटवा पाया है। इस मामले में इंदौर के कलेक्टर निशांत वरवड़े ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों को इस मामले में तेजी लाने के निर्देश दिए। वहीं आश्रम के वकील अनिल नायडू का कहना है कि उन्हें प्रशासन के विरुद्ध अभी भी स्टे मिला हुआ है।
सितंबर 2013 में इंदौर के तत्कालीन जिला कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने आश्रम की जांच कराई तो पता चला था कि वहां व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं। इसके अलावा वहां पेड़ों के बीच ऊंची बांउड्रीवॉल से घिरा एक बंगला, स्वीमिंग पूल, फव्वारा, पक्की सड़क और नारायण सांई के लिए बनाई गई एक विशेष कुटिया भी मिली थी। जबकि लीज की शर्तों के मुताबिक जमीन पर पक्का निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां नहीं हो सकतीं हैं। इसके अलावा स्कूल परिसर में 3 बीघा सरकारी जमीन पर भी कब्जा मिला था।
बता दें आसाराम ने 6.89 एकड़ की यह जमीन 1998 में एक रुपये प्रीमियम और इतने ही सालाना लीज पर ली थी। लिंबोदी और बिलावली गांव की यह जमीन उसे साल 2028 तक के लिए मिली थी।
जमीन वापस लेने के लिए तहसीलदार कोर्ट में जमीन अधिग्रहण और डीएम (कलेक्टर) कोर्ट में लीज की शर्तों का उल्लंघन करने के आधार पर दो मुकदमे भी चले। लेकिन इसी बीच आश्रम को हाई कोर्ट से स्टे मिल गया। जिसे प्रशासन आज तक नहीं हटवा पाया है।