मध्यप्रदेश के बक्सवाहा के जंगल में पुरातत्व विभाग को पाषाण युग की रॉक पेंटिंग व अति प्राचीन मूर्तियां मिली हैं। पेंटिंग को लेकर मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ आग की खोज से पहले की हैं। इलाके के जंगल को हाल में एक हीरा खनन परियोजना के लिए काटा जाने वाला था, लेकिन एनजीटी ने इस पर रोक लगा दी है।
भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बक्सवाहा जंगल के रॉक पेंटिंग पाषाण युग से संबंधित हैं। विभाग के अनुसार बक्सवाहा के जंगल में सर्वे के दौरान पाया गया है कि यहां पर तीन बड़ी रॉक पेंटिंग व अति प्राचीन मूर्तियां हैं। ये पुरातात्विक महत्व की हैं। इनसे पता चलता है कि बक्सवाहा का जंगली इलाका प्राचीन काल से मानव रहवास का रहा है।
बता दें, मप्र हाईकोर्ट ने पुरातत्व विभाग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट की प्रति विभाग के जबलपुर क्षेत्र के अधिकारियों ने जनहित याचिकाकर्ता पीजी नाजपांडे के अधिवक्ता एडवोकेट प्रभात यादव को भी मुहैया कराई है।
जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.रजत भार्गव के अनुसार पुरातत्व विभाग के सर्वे में पेंटिंग के अलावा कुशमार गांव में सती पाषाण प्रतिमा भी मिली है। इनके अलावा गणेश प्रतिमाएं, हनुमान मूर्तियां व अन्य प्रतिमाएं भी मिली हैं। विभाग ने डॉ. सुजीत नयन के नेतृत्व में क्षेत्र का सर्वे 10 से 12 जुलाई के बीच किया था।
हाईकोर्ट व एनजीटी के निर्देश पर किया सर्वे
दरअसल पुरातत्व विभाग को हाईकोर्ट व एनजीटी ने सर्वे कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इसके बाद विभाग ने छतरपुर जिले के बकस्वाहा के जंगल में सर्वे किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि बक्सवाहा में हजारों साल पुरानी तीन बड़ी रॉक पेंटिंग्स और कल्चुरी कालीन मूर्तियां पाई गईं।
लाल रंग की पेंटिंग आग की खोज से पहले की
रिपोर्ट के अनुसार एक रॉक पेटिंग लाल रंग की है, यह आग की खोज से पहले की बताई जा रही है। दूसरी पाषाण युग से मध्यकाल की है। ये लाल रंग और चारकोल से बनाई गई है। तीसरी रॉक पेंटिंग मानव इतिहास को दर्शाती है। इसमें पहाड़ों और गुफाओं पर युद्ध के चित्र उकेरे गए हैं। सर्वे में बक्सवाहा के गांवों में भगवान गणेश और हनुमान के अलावा चंदेल और कल्चुरी कालीन मूर्तियां भी मिली हैं। इन सभी की तस्वीरों को सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है।