बल्ला चलाते विधायक आकाश विजयवर्गीय
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क्रिकेट बैट से अधिकारी को पीटने के आरोपी भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय को जमानत मिल गई है। भोपाल सेशन कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया। आकाश को नगर निगम अधिकारी को बैट से पीटने के आरोप में 26 जून को इंदौर में गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायालय में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय की जमानत याचिका पर शनिवार को भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायालय पर सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्ष के वकीलों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश सुरेश सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत में केस डायरी नहीं पहुंचने का कारण सुनवाई में देरी हुई। केस डायरी इंदौर से भेजी गई थी।
क्या है मामला
बुधवार को इंदौर-3 विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए आकाश विजयवर्गीय ने जर्जर मकान को ढहाने पहुंचे निगम अधिकारी की बल्ले से पिटाई कर दी थी। उनकी निगम कर्मचारी से पहले बहस हुई थी। अपने कृत्य को लेकर उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि- पहले आवेदन, फिर निवेदन और फिर दे दनादन के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले विधायक की जमानत अर्जी गुरुवार को अदालत ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उनकी जमानत अर्जी एडीजे कोर्ट ने भी खारिज कर दी थी। अब जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत अर्जी दायर की गई है। जानकारों ने बताया कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के अनुसार यदि आकाश के खिलाफ जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है, वह ट्रायल के दौरान साबित हो जाती हैं तो वह चुनाव लड़ने के अयोग्य हो सकते हैं। यह समय सीमा सजा सुनाने की तिथि से छह साल तक प्रभावी होगी।
आकाश के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, मारपीट और बलवा के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। इनमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 और 148 के तहत कम से कम दो साल और अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है। केस में फैसला आने के समय अगर आकाश विधायक पद पर बने रहते हैं तो सजा को तीन महीने तक टाल दिया जाएगा। इस दौरान वह नए सिरे से आवेदन कर सकते हैं।