किसान को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- फोटो : अमर उजाला
आगर मालवा जिला कलेक्टर कार्यालय में बुधवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब अपने ही परिवार के सदस्यों से हुए विवाद की सुनवाई न होने से क्षुब्ध एक युवा किसान ने विषैला पदार्थ गटक लिया। घटना अपर कलेक्टर शालिनी श्रीवास्तव के कक्ष के ठीक बाहर की है। किसान की स्थिति अचानक बिगड़ने पर कलेक्ट्रेट परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। वहां उपस्थित संयुक्त कलेक्टर मिलिंद ढोके ने तत्काल संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बिना समय गंवाए अपनी निजी गाड़ी से पीड़ित को जिला अस्पताल पहुंचाया। जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार प्रदान करने के पश्चात चिकित्सकों ने गंभीर अवस्था को देखते हुए उसे निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। पीड़ित किसान की पहचान राहुल बंजारा के रूप में हुई है, जो अंतरसिंह बंजारा का पुत्र है।
ये भी पढ़ें-
सिंधिया परिवार संपत्ति विवाद: आरोपों के समर्थन में प्रतिमादेवी को पेश करने होंगे साक्ष्य, सुनवाई 29 अक्तूबर को
कलेक्ट्रेट परिसर में पसरा सन्नाटा
प्राप्त विवरण के अनुसार राहुल बंजारा अपनी गंभीर समस्या को लेकर सीधे जिला कलेक्टर से मिलकर गुहार लगाना चाहता था। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर कलेक्टर से उसकी भेंट नहीं हो सकी। इस असफलता से निराश होकर वह अपर कलेक्टर के कक्ष के बाहर पहुंच गया और वहीं अपने पास रखी कीटनाशक दवा पी ली। जहरीली दवा का सेवन करते ही उसकी हालत बिगड़ने लगी, जिससे शासकीय दफ्तर में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी नागेश यादव तत्काल पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
पाइपलाइन विवाद और पुलिस की उपेक्षा
मामले की जड़ में खेत में सिंचाई की पाइपलाइन बिछाने को लेकर हुआ पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है। राहुल का अपने ही परिवार के लोगों के साथ इस विषय को लेकर मनमुटाव चल रहा था। पीड़ित किसान ने पूर्व में इस संबंध में कानड़ थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। राहुल का आरोप है कि पुलिस थाने के कई चक्कर लगाने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसकी पीड़ा पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। पुलिस की इस उपेक्षा और लगातार सुनवाई न होने से आहत होकर ही वह कलेक्ट्रेट पहुंचा था।
जनसुनवाई व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
इस दुखद घटना के पश्चात पुलिस विभाग और जनसुनवाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। कानड़ थाना पुलिस ने किसान की पूर्व शिकायत पर क्या कदम उठाए थे, इस संबंध में अब तक प्रशासनिक या पुलिस अधिकारियों की तरफ से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। वर्तमान में पीड़ित किसान का निजी चिकित्सालय में उपचार चल रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी सेहत पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं।