मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार में पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने अफसरों को सड़कों से बिना मालिकों वाली गायों को हटाने का अल्टीमेटम दिया है। जिसकी वजह से देवरी गौशाला में एक हफ्ते के अंदर 3,000 गोवंश को ठूंस दिया गया है। मंगलवार-बुधवार की रात को ठंड लगने और कमजोरी की वजह से छह गायों की मौत हो गई थी।
जिसके कारण बुधवार को पशु चिकित्सक बुलाकर गायों का पोस्टमार्टम करवाया गया था। गौशाला में गायों की संख्या ज्यादा होने से चारे की ठीक तरह से व्यवस्था नहीं हो पा रही है। गायों की मौत पर नगर निगम कमिश्नर और गोसेवक सफाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि चारे की व्यवस्था तो है लेकिन गायों की ज्यादा संख्या के कारण खरोंटें (गायों के लिए चारा डालने वाला स्थान) कम पड़ गए हैं। उन्हें पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से वह कमजोर हो रही हैं।
बता दें कि मंत्री लाखन यादव ने 21 जनवरी को मुरैना के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह 26 जनवरी से पहले सड़कों पर बिना मालिकों वाली गायें नहीं दिखनी चाहिए। मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद गौवंश के संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बता चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बात फैल गई है कि अवारा गायों को गौशाला में रखा जाएगा। वहीं नगर निगम पांच दिनों से लगातार अभियान चलाकर आवारा घूमने वाले 500 से ज्यादा गौवंश को देवरी गौशाला पहुंचा चुका है।
गायों की मौत पर देवरी गौशाला के गौसेवक संजीव खेमरिया ने कहा कि 500 की क्षमता वाली गौशाला में 3,000 गौवंश हैं। ग्रामीण जबरन गायों को हांककर गौशाला में छोड़ गए। हम इन्हें न रख सकते हैं और न ही छोड़ सकते हैं। हम आखिर क्या करें। गौशाला में पर्याप्त मात्रा में चारा तो मिल रहा है लेकिन टिनशेड और खरोंटे का इंतजाम न होने की वजह से गायों की स्थिति बदतर होती जा रही है। जिन गायों की मौत हुई है उनमें से ज्यादातर कमजोर थीं।