मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल यहां कुछ मुस्लिम परिवारों का कहना है कि उनकी बेटियों के साथ परीक्षा केंद्र पर भेदभाव किया गया। दरअसल यहां परीक्षा केंद्र पर शहर के कंटेनमेंट जोन से आने वाली 40 मुस्लिम छात्राओं को अन्य परीक्षार्थियों से अलग बैठाया गया था, जिसके बाद यह विवाद खड़ा हुआ।
अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को नवलखा क्षेत्र के परीक्षा केंद्र बंगाली हायर सेकंडरी स्कूल में 12वीं की परीक्षा के दौरान करीब 40 छात्राओं को छत वाले एक पक्के मंच पर बैठाया गया था, जिसके बाद इन छात्राओं के परिवार वालों ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया।
इस्लामिया करीमिया गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल ने इस मामले में जिला प्रशासन को पत्र लिखा। संस्थान का कहना है कि उनके यहां की छात्राओं को स्कूल में तेज धूप में बैठाकर परीक्षा ली गई, जिसके बाद परिवार वालों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। पत्र में मांग की गई है कि अगले होने वाले परिक्षाओं में छात्राओं के लिए परीक्षा केंद्र में बैठने का बेहतर इंतजाम हो।
उधर, शिक्षा विभाग ने मुस्लिम छात्राओं के साथ किसी भी भेदभाव के आरोप को खारिज कर दिया है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र मकवाना ने कहा, "प्रशासन ने जिले के सभी 131 परीक्षा केंद्रों और 14 उप केंद्रों के लिए पहले ही आदेश जारी कर दिया था कि जो छात्र कंटेनमेंट जोन से आए हैं, उनके बैठने की अलग व्यवस्था की जाए। यह फैसला छात्रों में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए लिया गया था।" उन्होंने कहा कि बंगाली हायर सेकंडरी स्कूल में यही व्यवस्था लागू थी।
उन्होंने आरोपों का खारिज करते हुए कहा, "हमने छात्राओं को तेज धूप में नहीं, बल्कि स्कूल के उस पक्के मंच पर बैठाया था, जिसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।" उन्होंने बताया कि यह मंच तीन तरफ से बंद है। इसके अलावा परीक्षा के दौरान मंच पर बैठाई गईं 40 छात्राओं में एक हिन्दू छात्रा भी थी।"