बुरहानपुर में ताप्ती नदी के राजघाट पर एक बार फिर पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। इस बार नदी में चट्टान के नीचे से प्राचीन शिवलिंग मिला है। बताया जा रहा है कि यह शिवलिंग 900 साल पुराना है। यह बाकी शिवलिंगों की तरह आम नहीं है, बल्कि इसे एक ही संगेखारा पत्थर से तराश कर अखंड बनाया गया है। शिवलिंग पर इसी पत्थर से नाग भी बना हुआ है। आम तौर पर ऐसा शिवलिंग मिलना दुर्लभ माना जाता है।
असीरगढ़ की जामा मस्जिद में हुआ है ऐसे पत्थर का उपयोग
असीरगढ़ में बनी जामा मस्जिद में भी काले रंग के संगेखारा पत्थर का उपयोग हुआ है। गहरे काले रंग का यह पत्थर काफी मजबूत होता है। पुरातत्वविद कमरूद्दीन फलक ने बताया कि पानी के कारण शिवलिंग पर काई और कैल्शियम की परत जम गई है। यह वास्तव में यह कितना पुराना है, इसकी जांच कार्बन डेटिंग से ही संभव है। शिवलिंग के आधार पर पुरातत्व के जानकार कहते हैं कि, इससे शहर की सभ्यता की प्रचीनता का पता चलता है।
पुरातत्वविद् कमरूद्दीन फलक ने बताया कि शिवलिंग गहरे काले रंग के पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इस पत्थर को संगेखारा कहा जाता है। इसकी सबसे खास बात है इसपर बना नाग और इसकी अखंडता। पूरा शिवलिंग और उसपर बना नाग एक ही पत्थर से तराश कर बनाया गया है। चट्टान के नीचे जिस हिस्से में यह मिला है, वह नदी के बहाव के विपरीत है। इसलिए पानी के बहाव और बाढ़ में भी शिवलिंग का नहीं बहना लोगों को चकित कर रहा है। शिवलिंग यहां कैसे आया, इस बात की जानकारी किसी को नहीं है।
ताप्ती नदी में इससे पहले भी प्राचीन शिवलिंग, नंदी और मंदिर मिले हैं। नदी में बीचो-बीच कई स्थानों पर शिवलिंग और मंदिर है। इससे पहले नदी में एक नंदी मिला था, जो एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। इसे पुरातत्व विभाग को दे दिया गया था। इससे यह भी सिद्ध होता है कि बुरहानपुर शहर की सभ्यता फारूखी काल की ही नहीं, बल्कि इससे भी प्राचीन है।