पांच साल पहले भी मध्य प्रदेश के रतनगढ़ देवी मंदिर में एक बड़ा हादसा हो चुका है, फिर भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं थी।
अफवाहों को फैलने से रोकने और अफरातफरी की स्थिति को संभालने में व्यवस्था नाकाम रही। फिर वही गलती दोहराई गई। लाठियां चलाकर व्यवस्था बनाने के पुलिस के प्रयास ने स्थिति और बिगाड़ दी।
नतीजतन कुछ मिनटों में यहां मंजर बदल गया। जहां कुछ देर पहले मां के जयकारे गूंज रहे थे, वहां चीख और पुकार मच गई। चारो तरफ लाशें पड़ी थी, लोग लाशों के बीच अपनों को ढूंढ रहे थे।
हर साल रतनगढ़ के माता मंदिर में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के श्रद्धालु पहुंचते हैं। रेलिंग टूटने की अफवाह के बाद लोगों में भगदड़ मची।
इसे रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इससे भगदड़ रुकने होने के बजाए और बढ़ गई। इसके बाद तो सारा मंजर ही बदल गया। माता मंदिर के नजदीक बह रही सिंध नदी के पुल पर जहां भी नजर जाती लाशों के ढेर व घायल पड़े नजर आ रहे थे।
पुल पर हजारों की संख्या में यात्रियों के झोले, बैग, जूते, चप्पल व उनका सामान बिखरा पड़ा था। घायलों और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बदहवासी में लोग अपनों को खोज रहे थे।
देखिए, रतनगढ़ देवी मंदिर में भगदड़ की तस्वीरें
इस हादसे में पूरी तरह से प्रशासन की नाकामी सामने आई। मेले में भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं नहीं थी। भीड़ पूरी तरह से अनियंत्रित थी। न तो मेला सेक्टर बनाए गए थे और न मेला क्षेत्र में मजिस्ट्रेट तैनात थे। पुलिस भी पर्याप्त संख्या में नहीं थी।
दूर-दूर तक रतनगढ़ माता मंदिर की ख्याति
रतनगढ़ माता मंदिर के बारे में मान्यता हैं कि भगवान शिव ने मां दुर्गा के लिए यह मंदिर बनवाया था। ग्वालियर से लगभग 75 किलोमीटर दूर रतनगढ़ माता मंदिर की ख्याति मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई हैं।
यह मंदिर दतिया से 55 किलोमीटर दूर इंदरगढ़ भिंड जिले के मौ, झांसी उत्तर प्रदेश के समथर क्षेत्र व ग्वालियर की सीमा से सटा हुआ है। रतनगढ़ माता मंदिर में राज परिवार से लेकर हर वर्ग का श्रद्धालु पहुंचता हैं।
दस्यु गिरोहों के साये में भी रहा मंदिर
70 के दशक के बाद घने जंगलों के बीच पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में दस्यु सम्राटों ने आना जाना शुरू कर दिया था और दस्यु गिरोह यहां आसपास डेरा डाले रहते थे।
कुख्यात डकैत हरीबाबा तो अपने गिरोह के साथ मंदिर में ही रहता था। उसने यहां छह साधुओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद यहां आम श्रद्धालुओं की आवाजाही कम हो गई थी।
अंचल का कुख्यात गड़रिया गिरोह तो मंदिर के आसपास ही रहता था। गड़रिया गिरोह ने तो बाकायदा मंदिर पर भारी संख्या में घंटे भी चढ़ाए थे।
गड़रिया गिरोह के खात्मे के बाद रतनगढ़ माता मंदिर पर दस्युओं का भय खत्म होने से दूरदराज से लोगों की भी यहां आवाजाही शुरू हो गई थी, जिस पुल पर यह हादसा हुआ है वह अभी तीन-चार वर्ष पूर्व ही बनकर तैयार हुआ हैं।
2008 में भी हुई थी 100 लोगों की जलसमाधि
पांच साल पहले भी यहां एक हादसा हो चुका है। अक्तूबर 2008 में नवमी के मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु सिंध नहीं पार कर रतनगढ़ माता मंदिर जा रहे थे, तभी अचानक मणिखेड़ा और हरसी बांध से पानी छोड़ दिया गया था, जिसकी वजह से 100 से अधिक श्रद्धालुओं की जिंदा जलसमाधि बन गई थी।
इस घटना के बाद राज्य सरकार ने सिंध नदी पर पुल बनाने के आदेश दिए थे। घटना ने उस समय राज्य सरकार तक को हिलाकर रख दिया था और सरकार को इसमें दतिया व शिवपुरी जिले के कलेक्टर तक को लापरवाही में हटाना पड़ा था।
आमतौर पर सिंध नदी पर बने हरसी व मणिखेड़ा बांध के कारण पानी कम रहता है लेकिन शनिवार को ग्वालियर अंचल में हुई बारिश के बाद नदी और नाले उफान पर थे।
इसके बाद मणिखेड़ा बांध से भी पांच हजार क्यूसेक पानी नदी में पानी तेज बहाव पर था। इसी कारण प्रशासन का मानना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती हैं।