एक पूर्व चीनी सैनिक को भारत आने के लिए पांच महीने की जद्दोजहद के बाद गुरुवार को वीजा मिल गया। चीन के 80 वर्षीय पूर्व सैनिक वांग क्यू 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान कथित तौर पर रास्ता भटक कर भारत आ गया था और यहां बालाघाट जिले में अपना परिवार बसाने के दशकों बाद 2017 में वापस अपने देश चीन चला गया।
मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले के तिरोड़ी गांव से वांग क्यू के बेटे विष्णु ने बताया कि, मेरे पिता को आखिरकर गुरुवार दोपहर डेढ़ बजे भारत आने का वीजा मिला गया है। उन्होंने कहा कि एक या दो दिन के अंदर वह भारत यात्रा के लिये अपने टिकट बुक करा लेंगे।
विष्णु ने बताया कि इस बार अधिकारियों ने पिता को छह माह की अवधि के लिये वीजा दिया है और उसके बाद उन्हें फिर से नया वीजा लेने के लिये बीजिंग जाना होगा। उन्होंने कहा, फिलहाल हम खुश हैं कि आखिरकार उन्हें वीजा मिल गया। चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पूर्व सैनिक वांग क्यू को 1962 में चीन-भारत युद्ध के कुछ ही समय बाद भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करते हुए पकड़ा गया था। जासूसी के आरोप में क्यू छह साल तक भारतीय जेलों में बंद था।
जेल से रिहा होने के बाद क्यू मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के तिरोड़ी गांव में बस गया, जहां उन्होंने एक स्थानीय महिला से शादी कर ली। उसके चार बच्चे हैं। भारत में दशकों रहने के बाद 2017 में वह वापस अपने देश चीन चला गया।
बेटे विष्णु ने कहा कि यहां से चीन जाने के बाद वह अक्टूबर 2018 में भारत आये थे। उसके बाद वह भारत नहीं आ सके क्योंकि अप्रैल 2019 में आवदेन देने के बाद उन्हें भारतीय वीजा नहीं मिल पाया था। बीजिंग में भारतीय अधिकारियों ने बुधवार को पुष्टि की कि क्यू को भारत आने का वीजा दिया गया है।