देश के आठ प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में शिक्षकों की भारी कमी है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, आईआईटी बांबे, दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, खड़गपुर, मद्रास, रुड़की और वाराणसी में 36 फीसदी शिक्षकों के पद खाली हैं। मौजूदा समय में इन आठ संस्थानों में 65,824 छात्रों की तुलना में केवल 4,049 शिक्षक हैं। यहां शिक्षकों के लिए 6,318 स्वीकृत पद हैं।
नीमच के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को दिए गए जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बताया कि आईआईटी में शिक्षकों के 2,269 पद रिक्त हैं। इस हिसाब से प्रत्येक 16 छात्रों पर एक शिक्षक है। आईआईटी (बीएचयू) का हाल सबसे बुरा है। यहां 548 शिक्षकों की जगह केवल 265 फैकल्टी मेंबर हैं, जिसका मतलब है कि यहां 52 फीसदी पद रिक्त हैं।
शिक्षाविद् और करियर सलाहकार जयंतीलाल भंडारी ने कहा, देश में इस समय 23 आईआईटी संस्थान हैं।
यह चिंता की बात है कि सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित आठ आईआईटी में शिक्षकों की भारी कमी है। अगर इन संस्थानों का यह हाल है, तो नए संस्थानों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मंत्रालय के मुताबिक, आईआईटी खड़गपुर में 46, आईआईटी रुड़की में 42, आईआईटी कानपुर में 37, आईआईटी दिल्ली में 29, आईआईटी मद्रास में 28, आईआईटी बांबे में 27 और आईआईटी गुवाहाटी में 25 फीसदी पद रिक्त हैं।