डीडीसी पद के चुनाव परिणाम आने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की तस्वीर बदल गई है। बदले समीकरण में अध्यक्ष पद की कुर्सी बिना निर्दलीयों के सहारे किसी के हाथ नहीं लग पाएगी। ऐसे में अब निर्दलीय विजेता प्रत्याशी ही किंगमेकर की भूमिका निभाएंगे। गांधी परिवार के गढ़ में सपा ने दमखम दिखाते हुए १२ सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस ने नौ-नौ सीटें अपनी झोली में डाली हैं। पंचायत चुनाव में बसपा कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई, जबकि २२ निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव जीतकर राजनीति के दिग्गजों को चौंका दिया है।
जिस तरह चुनाव परिणाम आए हैं, उससे जाहिर है कि जिला पंचायत चुनाव में कड़ा मुकाबला होने वाला है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने के लिए गुणाभाग का दौर शुरू हो गया है। ५२ सीटों वाली जिला पंचायत में किसी दल को पूरा बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में भाजपा, सपा और कांग्रेस को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपने उम्मीदवार की ताजपोशी चाहिए तो उसे निर्दलीयों को अपने पाले में करना ही होगा। हालांकि भाजपा शुरू से ही यह कहती आई है कि अबकी बार जिला पंचायत अध्यक्ष उसकी पार्टी का ही होगा। अब यह तो आने वाला वक्त बताएगा कि कौन दल किस पर भारी पड़ता है।
नफा नुकसान खोजने में जुटे दलीय नेता
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होने के लिए भाजपा संगठन ने सभी ५२ सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसे केवल नौ सीटें ही हासिल हुई। कांग्रेस ने ३४ और सपा ने ३५ उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें सबसे ज्यादा फायदा सपा को हुआ है। बसपा ने ३२ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। सबसे हैरत की बात ये रही कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा की थी। हालांकि २२ निर्दलीयों में बसपा का दावा है कि उसके भी चार उम्मीदवार जीते हैं। अब इन दलों के वरिष्ठ नेता समीक्षा में करने जुट गए हैं कि चुनाव में हार की क्या वजह रही। कहां नफा और कहां नुकसान हुआ है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में संगठन को और नए सिरे से काम किया जा सके।
क्या कहते हैं प्रमुख दलों के अध्यक्ष
भाजपा जिलाध्यक्ष रामदेव पाल का कहना है कि सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें नौ विजयी हुए हैं। इसमें से छतोह द्वितीय सीट से बृजलाल पासी चुनाव जीते हैं, लेकिन मतगणना से पहले ही उनका निधन हो गया था। इस सीट पर दोबारा चुनाव होगा। उनका दावा है कि कई सीटों पर उम्मीदवार जीते हैं, जो भाजपा के ही हैं। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में वे पार्टी का साथ देंगे और जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा का ही बनेगा।
सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव का कहना है कि पार्टी समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। १२ सीटें जीतकर सपा ने नई ताकत दिखाई है। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में विजेताओं की क्या भूमिका रहेगी, इसका निर्णय सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करेंगे। कांग्रेस के जिला प्रवक्ता विनय द्विवेदी का कहना है कि सांसद सोनिया गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के निर्देश पर उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया।
पार्टी हाईकमान के निर्देश पर जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी की जाएगी। उनका कहना है कि जिन सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारे थे, लेकिन वहां पर पार्टी के ही लोगों ने चुनाव लड़़ा और जीत हासिल की। यह सब कांग्रेस के साथ हैं। बसपा जिलाध्यक्ष बालकुमार का कहना है कि कई उम्मीदवार बसपा के भी जीते हैं। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर अध्यक्ष के चुनाव में बसपा की भूमिका तय की जाएगी।