मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 14वें वित्त आयोग से प्रदेश को मिलने वाली रकम से अतिरिक्त 72526 करोड़ रुपये की मांग की है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने आयोग को प्रदेश की वर्तमान चुनौतियों के बारे में भी बताया।
मुख्यमंत्री गुरुवार को योजना भवन में 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. वाईवी रेड्डी के नेतृत्व में आई टीम के साथ विचार-विमर्श कर रहे थे। टीम वर्ष 2015 से 2020 तक की वित्तीय जरूरतों पर चर्चा को आई है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को जनसंख्या व पिछड़ेपन को देखते हुए बड़ी मदद दी जानी चाहिए।प्रमुख सचिव, वित्त आनंद मिश्रा ने राजकोषीय स्थिति पर प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रदेश की क्षेत्रीय विषमताओं पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रदेश के पिछड़ेपन को दूर करने तथा सभी वर्गों के विकास के लिए आयोग के समक्ष अन्य राज्यों की तुलना में केंद्रीय करों में उत्तर प्रदेश को और अधिक आर्थिक सहायता देने की मांग की।
उन्होंने वित्त आयोग से राज्यों के बढ़े हुए दायित्वों को देखते हुए केंद्रीय करों की राजस्व प्राप्तियों में राज्यों के अंश को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 36 प्रतिशत करने का आग्रह किया।
इस पर विशेष जोर दिया कि राज्यों की हिस्सेदारी में 1971 की जनसंख्या के बजाय 2011 की जनसंख्या का उपयोग किया जाना चाहिए। वर्ष 2000 में उत्तराखंड बन जाने के बाद 1971 की जनसंख्या के आंकड़े प्रासंगिक नहीं रह गए हैं।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने अध्यक्ष व सदस्यों को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि अपनी सिफारिशें देते समय वित्त आयोग उत्तर प्रदेश की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखेगा।
वित्त आयोग के सदस्य प्रो. अभिजीत सेन, सुषमा नाथ, डॉ. एम. गोविंदा राव, डॉ. सुदीप्तो मुंडले एवं सचिव एएन झा के अलावा लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव, स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन के अलावा और भी कई लोग मौजूद थे।
बिजली के लिए मांगे 35 हजार करोड़, तो मिला जवाब
राज्य सरकार ने 14वें वित्त आयोग के सामने बिजली के लिए 35 हजार करोड़ रुपये की मांग रखी। इसमें 20 हजार करोड़ रुपये वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) के लिए राजस्व अनुदान के रूप में मांगी गई है जबकि योजनाओं में पूंजी निवेश के लिए 15 हजार करोड़ रुपये की मांग रखी गई है।
सरकार की ओर से वित्त आयोग के सामने वर्ष 2016 में शहरी इलाकों में 20 घंटे व ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली देने का दावा करते हुए बिजली के क्षेत्र में सुधार, चोरी और लाइन हानियां कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी गई।
प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि सरकार 2016 के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुसार बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
इसके लिए अतिरिक्त धन की जरूरत होगी। इस पर वित्त आयोग की टीम ने कहा कि प्रदेश में लाइन लॉस काफी अधिक है। इसे कम करने की दिशा में प्रयास करने चाहिए।
साथ ही बिजली उत्पादन पर जो खर्च आ रहा है, उसे ध्यान में रखते हुए टैरिफ का निर्धारण होना चाहिए। आमदनी व खर्च में यदि बैलेंस नहीं होगा तो स्थिति कभी ठीक नहीं होगी।
स्थानीय निकायों के लिए मांगी अतिरिक्त सहायतानगरीय स्थानीय निकायों द्वारा नागरिक सुविधाओं को मानक के आधार पर उलब्ध कराए जाने एवं आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के लिए वर्ष 2015 से 2020 की अवधि में 2,12,658 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। ग्रामीण पंचायतीराज संस्थाओं में परिसंपत्तियों के रख-रखाव और नागरिक सुविधाओं के लिए लगभग 70,485 करोड़ रुपये की सहायता की मांग की गई।