डॉ. सागर।
लखनऊ। मुंबई जैसे बड़े शहर में भी छोटे-छोटे स्थानों से आए लोगों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर विशिष्ट पहचान स्थापित की है। वर्तमान समय में सिनेमा जगत भी गांवों, कस्बों और वहां के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे में कॅरिअर बनाना है तो युवाओं को लगातार अध्ययन व लेखन में भी ध्यान लगाना होगा। ये बातें प्रसिद्ध गीतकार डॉ. सागर ने कहीं।
मौका था बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार को ''सिनेमा, कविता और हाशिए का समाज'' विषय पर आयोजित व्याख्यान का। उन्होंने कहा कि यदि लेखन में ईमानदारी, समाज के प्रति संवेदनशीलता और सतत अभ्यास हो तो सफलता मिलेगी। आईएएस अधिकारी योगेश कुमार ने कहा कि आधे-अधूरे मन से किया गया प्रयास कभी उत्कृष्ट परिणाम नहीं दे सकता, इसलिए समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम सफलता की कुंजी हैं। इस मौके पर गायक हंसराज, अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सनातन नायक, कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रणब कुमार आनंद मौजूद रहे।