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यूथ बोला, खुद से करनी होगी शुरुआत

Sun, 11 Aug 2013 01:17 PM IST
लखनऊ/दीप सिंह
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देश की आजादी के लिए सैकड़ों साल तक अंग्रेजों से संघर्ष किया। आने वाली पीढ़ी को गुलामी से निजात दिलाने को देशभक्तों ने कुर्बानियां दीं जिसकी बदौलत देश आजाद हुआ।
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आजादी का जश्न भी हम तब से मनाते आ रहे हैं लेकिन उसी समय से यह आशंका भी उठती रही है कि कहीं यह आजादी फिर से खतरे में न पड़ जाए।

आजादी के इन्हीं खतरों और उससे मुकाबला करने के संकल्प के साथ ही गीतकार शकील बदायूंनी ने आजादी का तराना ‘अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं...’ लिखा होगा।

देश की आजादी के लिए खतरे आज भी हैं। आज का युवा इन खतरों को बखूबी महसूस कर रहा है। आजादी की 66वीं वर्षगांठ से पहले शहर के युवाओं से बात की गई तो उन्होंने इन खतरों पर खुलकर चर्चा की और इनसे लड़ने के लिए संकल्प भी लिए।
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शहर के युवा भ्रष्टाचार को देश की आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा मान रहे हैं। उनका तर्क है कि भ्रष्टाचार हमारे सिस्टम में पूरी तरह घर कर गया है। इससे हमारा सिस्टम अपाहिज हो गया है। यह भ्रष्टाचार देश को फिर से गुलाम बना सकता है। भ्रष्टाचारी देश की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर सकते हैं।

युवाओं का कहना है कि भ्रष्टाचार के कारण ही गरीबी नहीं मिट रही। इस वजह से गरीब भी भ्रमित होकर आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी गतिविधियों में फंस रहे हैं। अलग राज्यों की मांग उठ रही है।

इससे अलगाववाद की नई समस्या पैदा हुई है। जातिवाद, अलगाववाद के अलावा महिला हिंसा और उन्हें गैरबराबरी का दर्जा भी बड़ा संकट लगता है। इन खतरों से लड़ने के लिए युवाओं के कुछ संकल्प भी हैं। वे कहते हैं कि सबसे पहले तो खुद ही ईमानदार होना होगा।

हर तरफ आजादी के लिए खतरा
स्कूल में बच्चा पढ़ने जाता है, वहीं से उसका साबका भ्रष्टाचार से पड़ने लगता है। वह उसी को देख रहा है। हम अपनी पीढ़ी को दे ही क्या रहे हैं? हर तरफ खतरे ही खतरे हैं। हमें असली आजादी मिली ही कहां है? घर से लेकर बाहर तक लड़कियों का शोषण हो रहा है। हम नई पीढ़ी को कुछ दिशा नहीं दे पा रहे। वह दिशाहीन हो रही है। सीधे-सादे लोगों को दबाया जा रहा है। ऐसे आम आदमी की बात सुनने वाला कोई नहीं है। जब तक हम सभी को उनकी बात रखने का हक नहीं दे देते तो आजादी किस काम की। युवाओं की बातें तो सभी करते हैं लेकिन उनके लिए ही कोई कुछ नहीं कर रहा। हम व्यवस्था में शामिल होकर ही उसमें परिवर्तन ला सकते हैं।- सुधीर तिवारी, निजी कम्पनी में कंसल्टेंट
लड़कियों की असुरक्षा बड़ा खतरालड़कियों का असुरक्षित होना सबसे बड़ा खतरा है। फ्रीडम सिर्फ कहने को है। अपनी मर्जी से घर के बाहर निकलना मुहाल है। लड़की घर से निकले तो खूब सवाल किए जाते हैं पर लड़कों के साथ तो ऐसा नहीं होता। सोसायटी में कुछ बदलाव आया है लेकिन पूरी तरह नहीं। आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं जिन्हें सुनकर लगता है कि सुरक्षा नाम की कोई चीज है ही नहीं। कोई घटना होती है तो नया कानून बना दिया जाता है। सबको शांत करना है इसलिए कानून बन जाता है लेकिन उसकी उपयोगिता और अमल पर कोई ध्यान नहीं देता। महिलाओं से भेदभाव की शुरुआत घर से ही होती है। मानसिकता में बदलाव के लिए भी हमें वहीं से शुरुआत करनी होगी। - श्रद्धा सिंह, स्टूडेंट, बीकॉम थर्ड ईयर
महिला हिंसा के रहते आजादी अधूरीमहिलाओं के प्रति हिंसा और गैरबराबरी एक बड़ा खतरा है। ऐसी आजादी अधूरी है जहां आज भी महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। लड़का-लड़की में फर्क किया जाता है। शिक्षित हो या अशिक्षित लेकिन मानसिकता में बहुत बदलाव नहीं दिखता। जब आधी आबादी आगे नहीं बढ़ेगी तो देश कैसे तरक्की करेगा? आज आजादी के मायने समान अभिव्यक्ति और तरक्की ही है। महिलाओं को आजादी न मिलना तरक्की के लिए बड़ा खतरा है। हम अपने स्तर से ही इस मानसिकता में बदलाव ला सकते हैं। इसकी शुरुआत हमें घर से ही करनी होगी और फिर अपने आसपास के लोगों को इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं।- डॉ. कौशिकी सिंह, रीडर कॉमर्स, नेशनल पीजी कॉलेज
भ्रष्टाचार से अपाहिज सिस्टमभ्रष्टाचार और जातिवाद दो बड़े खतरे हैं जो हमारी आजादी में रुकावट बने हुए हैं। इससे पूरा सिस्टम अपाहिज हो गया है। किसी भी काम के लिए जाइए तो रिश्वत देनी पड़ती है। एक क्लर्क से लेकर आईएएस अफसर और हमारे नेता तक, सभी इसको बढ़ावा दे रहे हैं। हम खुद ही अपने स्तर इसे रोक सकते हैं। जहां पर हैं, वहां अपना काम ईमानदारी से करें। ऐसा करके ही सबसे बड़े खतरे से निपटा जा सकता है। हम तय कर लें कि मुझे रिश्वत नहीं देनी है और न लेनी है। जब लोग यह ठान लेंगे तभी भ्रष्टाचार रुकेगा।- डॉ. मुकेश मिश्रा, बाल रोग विभाग, केजीएमयू
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