फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलेगा सिलेबस, मिलेगा एक्सपोजर

Sun, 11 Aug 2013 12:37 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. आरके खांडल
विज्ञापन

कुलपति, जीबीटीयू

वर्ष 2010 तक यूपीटीयू ने खूब ग्रोथ की, लेकिन दो भागों-गौतम बुद्ध और महामाया यूनिवर्सिटी में बंटने के बाद से इसे खासा नुकसान हुआ। छात्रों के साथ कर्मचारी भी कनफ्यूज हो गए।

इसके स्वरूप को और बेहतर बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2014 में यहां एक सीट के लिए दो से तीन लोग आवेदन करेंगे। इसके साथ ही सेकंड, थर्ड और फोर्थ ईयर का सिलेबस और एडवांस हो जाएगा। इसके साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम भी शुरू किए जाएंगे।
विज्ञापन

तीन माह से बंद थी यूनिवर्सिटी सितंबर 2012 में जब मैंने ज्वाइन किया तो यहां तीन माह से तालाबंदी चल रही थी। मुझसे पहले वाले वीसी आईआईटी कानपुर से ऑपरेट कर रहे थे। रजिस्ट्रार हॉस्पिटल में थे और कर्मचारी हड़ताल पर।

यह भी पता चला कि यहां के 112 लोगों के स्टाफ में सिर्फ पांच लोग रोल पर हैं और बाकी मानदेय पर। बड़ी उम्मीदों से आया लेकिन यहां के हालात देख शॉक लगा। कर्मचारियों से बात कर उन्हें समझाया और हड़ताल खत्म कराके काम शुरू कराया। लोगों ने कहा कि 300 से ज्यादा कॉलेजों में बस 20-25 ही ठीक हैं।

मुझे कुछ अजीब लगा। मैंने कॉलेजों के चेयरपर्सन और डायरेक्टर के साथ मीटिंग की। इसके बाद बड़े स्तर पर कॉलेजों में काउंसिलिंग का मन बनाया। इसके लिए 130 कॉलेजों को फाइनल किया। देखिए जिस काउंसलिंग में दो से ढाई माह लग जाते थे वह 20 दिन में ही पूरी हो गई।
ऑर्गनाइजेशन स्ट्रक्चर खड़ा करना है मैं अभी तक कर्मचारियों और यूनिवर्सिटी के लिए उतना नहीं कर पाया हूं जितना सोचा था। वर्ष 2014 में यूनिवर्सिटी अपनी बिल्डिंग में शिफ्ट हो जाएगी। मैनपॉवर भी बढ़ाया जाएगा।

यूनिवर्सिटी से जुड़े सभी कालेजों को स्टेट ऑफ द आर्ट और मॉडल कॉलेज बनाया जाएगा। इसके लिए मैं आए दिन कॉलेजों का निरीक्षण कर रहा हूं ताकि उनकी खामियां और खासियतें पता चलें।
रिसर्च के लिए अलग प्रोग्राम विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटी में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी शामिल नहीं है। उनके यहां 60 प्रतिशत पढ़ाई के साथ 40 प्रतिशत जोर रिसर्च पर रहता है।

हमारे यहां ऐसा नहीं है। इसलिए वर्ष 2014 तक हमारे यहां कई बदलाव किए जाएंगे। अब सिर्फ बीटेक से काम नहीं चलेगा। इसलिए पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम एमटेक, एमआर्क, एमफार्मा शुरू कराए जाएंगे।

खासतौर से आईईटी समेत दूसरे सरकारी कॉलेजों में बीटेक के भी अलग प्रोग्राम शुरू होंगे। इसके साथ ही कोर्स में ट्रेनिंग इन इंडस्ट्री, इंडस्ट्री एक्सपोजर और रिसर्च प्रोग्राम को शामिल करने पर जोर होगा।
विज्ञापन


हम विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ भी टाइअप करेंगे। यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों में टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबरेटर डवलप करेंगे। यूनिवर्सिटी के साथ उद्योगों को ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें