अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में इन युवाओं का प्रतिनिधित्व विधानसभा चुनाव में बेहद अहम साबित होगा। न केवल गांवों में ये अपनी अगले साल तक अच्छी पैठ बना चुके होंगे, बल्कि राजनीतिक अनुभव प्राप्त कर चुके होंगे। ऐसे में अपने-अपने दलों में ये अपनी पार्टी के लिए राजनीतिक समीकरण साधने और विकल्प बनने में खास भूमिका अदा करेंगे।
खरीद-फरोख्त के चक्रव्यूह से बचना होगा
युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए होने वाली खरीद-फरोख्त के चक्रव्यूह से बचें। अभी से इस बाबत उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए गए हैं। युवाओं को यह बात समझनी होगी कि यदि राजनीति में लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो इस लालच से बचना होगा। पार्टी के बड़े और पुराने दिग्गज उन्हें यह बात समझा भी रहे हैं।