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अंतरिक्ष विज्ञान में लखनऊ का कमाल: युवा शोधकर्ताओं ने खोजा नेबुला, ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में करेगा मदद

Mon, 08 Jun 2026 11:30 AM IST
Bhupendra Singh विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

लखनऊ के खगोल वैज्ञानिकों के हाथ बड़ी उपलब्धि लगी है। मोनोसेरोस तारामंडल में 45 प्रकाश वर्ष से अधिक व्यास का नया नेबुला मिला है। अमेरिकन ऐस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी जर्नल ने खोज को मान्यता दी है। इस दुर्लभ नेबुला का नाम बबलगम रखा गया है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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अंतरिक्ष में खोजा नेबुला, नाम दिया बबलगम - फोटो : IANS
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विस्तार
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अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लखनऊ के लिए गर्व की खबर है। शहर के स्वतंत्र युवा खगोल शोधकर्ता उत्कर्ष मिश्रा और संकल्प मोहन की टीम ने अंतरिक्ष में एक नए और दुर्लभ नेबुला (निहारिका) की खोज की है। मोनोसेरोस तारामंडल में मिले इस विशाल नेबुला को बबलगम नाम दिया गया है।
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अमेरिकन ऐस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी जर्नल ने उत्कर्ष और संकल्प के इस खोज को प्रकाशित करते हुए मान्यता दी है। अब अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हारवर्ड ई. बॉन्ड और डॉ. पैट्रिक एम. इस नए नेबुला पर अध्ययन कर रहे हैं। इस खोज ने दुनिया भर के खगोलविदों का ध्यान आकर्षित किया है। माना जा रहा है कि नए नेबुला से तारों के जीवन चक्र और सुपरनोवा विस्फोटों से जुड़े कई रहस्यों को समझने में मदद मिल सकती है।
 

कई वर्ष तक तस्वीरों का किया अध्ययन

शोधकर्ता उत्कर्ष मिश्रा ने बताया कि बबलगम नेबुला की प्रारंभिक पहचान वर्ष 2021 में गहरे अंतरिक्ष की विशेष नैरोबैंड तस्वीरों के अध्ययन से हुई। शुरुआती विश्लेषण में इसकी चमक और संरचना सामान्य नेबुलाओं से अलग दिखाई दी। बाद में कई वर्ष तक विस्तृत जांच की गई जिसके बाद इसके अस्तित्व की पुष्टि हुई है।

जानिए क्या होता है नेबुला?

नेबुला (निहारिका) अंतरिक्ष में फैले गैस के विशाल बादल होते हैं। इन्हीं क्षेत्रों में नए तारों का जन्म होता है। कई बार तारों के जीवन के अंतिम चरण के बाद भी ऐसी संरचनाएं बनती हैं। वैज्ञानिक इनके अध्ययन से ब्रह्मांड के विकास और तारों के जीवन चक्र को समझते हैं।
 
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इसीलिए खास है बबलगम

अध्ययन में मेंटोर की भूमिका निभाने वाले डॉ. सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य तौर पर नेबुला में हाइड्रोजन और सल्फर गैसों की मौजूदगी रहती है जो इसे चमक प्रदान करते हैं। बबलगम में इन गैसों का अभाव पाया गया। सिर्फ ऑक्सीजन-3 गैस के उत्सर्जन के कारण इस संरचना में चमक है। यह नेबुला पृथ्वी से लगभग 5,870 प्रकाश वर्ष दूर है। इसका व्यास 45 प्रकाश वर्ष से अधिक है। प्रकाश की गति से चलने पर इसके एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में 45 वर्ष से ज्यादा समय लगेगा।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह खोज

अब इस नेबुला का विस्तृत स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इसकी ऊर्जा का स्रोत क्या है और यह वास्तव में किस प्रकार की खगोलीय संरचना है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह खोज अंतरिक्ष में गैस से बने बादलों, सुपरनोवा अवशेषों और तारों की विकास की प्रक्रियाओं को समझने में नई दिशा देगी।
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