मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े केस सरकार वापस लेने जा रही है। इसके लिए न्याय विभाग ने मुजफ्फरनगर और शामली के जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों में 500 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे।
इसमें से दंगा भड़काने, हिंसा, हत्या और हत्या के प्रयास समेत 131 मामलों को वापस लेने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें हत्या के 13 और हत्या के प्रयास के 11 मुकदमे भी शामिल हैं।
कानून मंत्री ब़ृजेश पाठक ने बताया कि सरकार ऐसे मुकदमे वापस लेने पर विचार कर रही है जो राजनीति से प्रेरित होकर दर्ज कराए गए थे।
इसमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जो भी विधायक या सांसद शिकायत करेगा उनके मुकदमों का परीक्षण कराकर सरकार मुकदमे वापस लेने पर विचार करेगी। इन मामलों में मुजफ्फरनगर दंगे से जुड़े मुकदमे भी शामिल हैं या नहीं इसका सीधा जवाब मंत्री की ओर से नहीं दिया गया।
मालूम हो कि इन मुकदमों की वापसी को लेकर पिछले ही महीने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक लगभग 150 मामलों की सूची के साथ मुख्यमंत्री से मिले थे और इन मामलों को वापस लेने का आग्रह किया था।
बालियान का कहना था कि यह सभी मामले राजनीति से प्रेरित हैं। 2013 में अखिलेश सरकार के दौरान हुए इन साम्प्रदायिक दंगों में 62 लोगों की मौत हो गई थी।
दंगों पर काबू पाने के लिए प्रदेश सरकार को सेना बुलानी पड़ी थी। इस दौरान 1455 लोगों पर कुल 503 मुकदमे दर्ज किए गए थे। सूत्रों का कहना है कि इसमें से 131 मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
मुकदमा वापस लिए जाने के बाबत प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जिसमें किसी पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जा रहे हों।
जबकि दावा किया जा रहा है कि न्याय विभाग ने जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों से इस संबंध में डिटेल मांगी है।