प्रदेश सरकार निष्प्रयोज्य व अनुपयोगी कानूनों को खत्म करने की कार्यवाही तेज करेगी। इससे उद्यमियों व आम लोगों को अनावश्यक कायदे-कानून की उलझन से छुट्टी मिलेगी और काम आसानी से हो सकेगा। राज्य विधि आयोग ने 1289 निष्प्रयोज्य व अनुपयोगी अधिनियमों को समाप्त करने की संस्तुति की है। करीब 410 से अधिक कानूनों को समाप्त किया जा चुका है। इनमें तमाम कानून 100 वर्ष से भी पुराने हैं। अब उद्योगों पर भार साबित हो रहे कानूनों को समाप्त करने का काम बढ़ने जा रहा हक़। आम लोग कम कागजी औपचारिकता निभाकर उद्योग लगा सकेंगे। आने वाले दिनों में 50 से ज्यादा और अनुपयोगी कानून खत्म हो सकते हैं। इन नियमों को खत्म करने की कार्यवाही अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टंडन की देखरेख में हो रही है।
इन कानून को भी समाप्त करने की तैयारी
- इंडियन फारेस्ट यूपी रूल 1964
- यूपी कलेक्शन एंड डिस्पोजल आफ ड्रिफ्ट एंड स्टैंडर्ड वुड एण्ड टिंबर रूल्स
- यूपी कंट्रोल आफ सप्लाई डिस्ट्रब्यूशन एंड मूवमेंट आफ फ्रूट प्लांटस आर्डर-1975
- यूपी फारेस्ट टिंबर एंड ट्रांजिट आन यमुना
- टन व पबर नदी रूल्स 1963
- यूपी प्रोडयूस कंट्रोल तथा यूपी प्रोविंसेस प्राइवेट फारेस्ट एक्ट
- यूपी रूल्स रेगुलेटिंग द ट्रांसपोर्ट टिंबर इन कुमाऊं सिविल डिवीजन -1920। इस कानून को बने सौ साल हो गए। 20 वर्ष पहले तो कुमाऊं सहित पूरा उतराखंड अलग राज्य बन गया। वन विभाग का यह नियम अभी यूपी में लागू है।
- 82 वर्ष पुराना यूपी रूल्स रेगुलेटिंग ट्रांजिट आफ टिंबर आन द रिवर गंगा एबब गढ़मुक्तेश्वर इन मेरठ डिस्ट्रिक एंड आन इटस ट्रिब्यूटेरिस इन इंडियन टेरिटेरी एबब ऋषिकेश- 1938 भी खत्म करने की योजना है।
- यूपी इशेंसियल कॉमोडिटीज से जुड़े चार नियम हैं। अब इनको एक किया जा सकता है।
- यूपी शिड्यूल्ड कॉमोडिटीज से जुड़े चार आदेश हैं। इनको भी विलय किया जा सकता है।
- यूपी कैरोसीन कंट्रोल आर्डर 1962, यूपी सेल्स आफ मोटर स्प्टि , डीजल आयल, एंड अल्कोहल टैक्सेशन एक्ट की उपयोगिता पर भी विचार हो रहा है।