केजीएमयू के इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का असर हो गया है। शासन ने इनकी भता बढ़ाने की मांग पर कार्रवाई के लिए कमेटी बना दी है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। यह कमेटी तय करेगी की इंटर्नशिप भते को कितना बढ़ाया जाए।
केजीएमयू सहित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर इंटर्नशिप भता बढ़ाए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो.केके गुप्ता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसमें विशेष सचिव वित और विशेष सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। इस कमेटी को 05 दिसंबर 2020 तक अपनी संस्तुति शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी जरूरत पडने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के किसी विशेषज्ञ की सलाह भी ले सकती है।
रंग लाई लंबे समय से जारी लड़ाई
15 जुलाई 2020 को इंटर्न ने अपनी मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात की थी। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उतर प्रदेश में उनहें 7500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है ,जो कि अन्य राज्यों और केंद्रीय संस्थानों में मिलने वाले मानदेय से बहुत कम है। असम में यही मानदेय 31500, कर्नाटक में 30000, पश्चिम बंगाल में 28050 रु तथा केंद्रीय संस्थानों में 23500 रु प्रतिमाह है। उतर प्रदेश में इंटर्न चिकित्सकों के मानदेय में पिछले 10 साल से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।