एक बात और, केंद्र व राज्य में अलग-अलग सरकार होने से विकास पर कई बार नकारात्मक असर नजर आता था। राज्य केंद्र की योजनाएं लागू करने में आनाकानी करता था तो केंद्र बजट देने में भेदभाव। योगी ने केंद्र में अपनी ही पार्टी की सरकार होने का भरपूर लाभ उठाया।
केंद्र की किसान सम्मान निधि, आयुष्मान सहित तमाम योजनाओं का फायदा राज्य के लोगों तक पहुंचाने को भरपूर तवज्जो दी तो राज्य स्तर पर केवल नाम तक सीमित योजनाओं को बंद करने का साहस भी दिखाया है।
योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च, 2017 को जब सीएम पद की शपथ ली तो उनके साथ भगवा और कंठीधारी सीएम जैसे तमगे जोड़े जाते थे। तीन साल में योगी ने सरकार व शासन में पारदर्शिता के लिए टेक्नोलॉजी पर जोर दिया।
ई-ऑफिस, ई-टेंडर, ई-पीओएस मशीन जैसी पहल की तो सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग में ऑनलाइन लाइव डैशबोर्ड जैसे प्रयोग शुरू किए। योगी ने खुद लैपटॉप व आईपैड का इस्तेमाल शुरू कर उदाहरण पेश किया।