सत्ता के गलियारों में चर्चा तेजी से बढ़ी है कि सरकार धर्म संसद के पहले प्रयागराज कैबिनेट में ही राम मंदिर निर्माण के संबंध में कोई बड़ा एलान कर सकती है। कोर्ट का फैसला पक्ष में न आने पर अध्यादेश लाकर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने का एलान तक संभव है।
तर्क देने वालों का कहना है कि पिछले 25 नवंबर को अयोध्या में विहिप की धर्मसभा की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी वहां दुनिया की विशालतम भगवान राम की प्रतिमा स्थापित करने का एलान कर चुके हैं। संगम तट से इस तरह का संकल्प व्यक्त कर सरकार आगामी लोकसभा चुनाव को एक दिशा देने का काम कर सकती है।
हालांकि आधिकारिक रूप से इस संबंध में कोई भी बोलने को तैयार नहीं है। केंद्र की मोदी सरकार पर हिंदू संगठनों का राम मंदिर निर्माण को लेकर जबर्दस्त दबाव बना हुआ है।