भाजपा के रणनीतिकार ही नहीं खुद मुख्यमंत्री भी शायद यह अच्छी तरह जानते हैं कि उन्हें इतने भारी बहुमत के साथ अगर सत्ता सौंपी गई है तो उसके पीछे कहीं न कहीं सरोकारों से लोगों का जुड़ाव भी रहा है। लोगों की आकांक्षा है कि सरकार के स्तर पर इनके ख्याल व सम्मान का काम हो। मथुरा-वृंदावन तथा अयोध्या को नगर निगम का दर्जा देकर सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ी। इन स्थानों सहित हिंदुओं की आस्था से जुड़े अन्य स्थानों को लगातार बिजली और इनके विकास के लिए कई काम शुरू कराकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ये स्थान सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में है। पर, मुख्यमंत्री और रणनीतिकार शायद इस बात को भी समझते थे कि मामला सिर्फ काम कराने से नहीं बनेगा बल्कि इनके प्रति सरकार की आस्था का संदेश जाते रहना चाहिए। योगी ने इस काम की खुद अपने कंधों पर जिम्मेदारी ली। जाहिर है कि चर्चा होनी ही थी और हुई भी।
यह है प्रमाण
योगी आदित्यनाथ पिछले 11 महीने में अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और काशी की कई यात्राएं कर चुके हैं। विंध्यवासिनी धाम, नैमिषारण्य, प्रयाग, देवीपाटन, चित्रकूट, कामद गिरि सहित हिंदुत्व से जुड़े लगभग सभी प्रमुख स्थलों का दौरा कर चुके हैं और वहां के विशिष्ट आयोजनों में हिस्सेदारी करके उन्हें और ज्यादा चर्चित तथा अतिविशिष्ट बना चुके हैं। शुक्रवार से शुरू हो रहा मथुरा-वृंदावन का दौरा भी उनकी सांस्कृतिक पर्यटन की ब्रांडिंग की कोशिशों को और आगे बढ़ाएगा। उनका यह दौरा कृष्ण की मथुरा-वृंदावन से शुरू होकर राधा की नगरी बरसाना में पूरा होगा। शनिवार को वह लगभग पूरा दिन बरसाना में ही गुजारेंगे और हुरियारों के साथ होली खेलेंगे।
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम
23 फरवरी
- अपराह्न 4 बजे लोहवन मथुरा में फाल्गुन उत्सव में हिस्सा
- शाम 5 से रात्रि 10 बजे तक वेटनरी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भागीदारी
24 फरवरी
- दोपहर 12 बजे माताजी गौशाला
- अपराह्न 1.40 से राधा बिहारी इंटर कॉलेज बरसाना में कार्यक्रम (कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कई मंत्री भी रहेंगे। इसके अलावा हरियाणा और मणिपुर के मुख्यमंत्री का भी कार्यक्रम प्रस्तावित है।)