सिद्धार्थनाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा, सतीश महाना, आशुतोष टंडन सहित नए व पुराने कई ऐसे नाम हैं जिनकी दिल्ली में पहुंच एवं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ नजदीकी की चर्चाओं के साथ मंत्रिमंडल में जगह पक्की मानी जा रही थी। पर, ऐसा नहीं हुआ। इनमें कुछ नामों को लेकर चर्चा है कि उन्हें दूसरी भूमिका सौंपी जाएगी। बावजूद इसके मंत्रिमंडल के गठन से यह संदेश तो साफ ही हो गया है कि नेताओं की नजदीकी से पार्टी में किरदारों की मजबूती का दौर बीत गया।
मौजूदा भाजपा की जरूरत सिर्फ परिणाम देने वाले, चुनौतियों की कसौटी पर खरे उतरने वाले चेहरे हैं । जिस तरह इस बार 2024 की जरूरतों की चली है उसी तरह आगे भी भावी चुनौतियों की चलेगी। इन चुनौतियों से पार पाने का भरोसा दिलाने वालों को पद भी मिलेगा और कद भी बढ़ेगा।