बात 30 सितंबर 2014 की है। गोरखपुर कैंट स्टेशन के पास नंदानगर रेलवे क्रासिंग पर लखनऊ-बरौनी और मडुआडीह-लखनऊ एक्सप्रेस की भिड़ंत हुई थी। रात हो रही थी। हादसे की जगह से रेलवे और बस स्टेशन की करीब 5.6 किमी की दूरी थी। हजारों यात्री, साधन उतने थे नहीं। सामान और परिवार के साथ स्टेशन तक पहुंचना मुश्किल था। तब योगी गोरखपुर के सांसद थे।
चर्चा होने लगी कि छोटे महाराज (उस समय पूरे पूर्वांचल के लोग उनको यही कहते थे) आ जाते तो सब ठीक हो जाता। समस्या की गंभीरता का पता चलते ही वर्षों की परंपरा तोड़कर वह मौके पर पहुंचे। साथ में उनके खुद के संसाधन और समर्थक भी थे। इसके बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ और देर रात तक सब सुरक्षित स्टेशन पहुंच चुके थे।
कोरोना से निपटने का जुनून भी कम नहीं
इस बार कोरोना से निपटने में भी सीएम योगी का जुनून कम नहीं नजर आ रहा है। इसे हराने के लिए योगी ने दिन रात एक कर दिया है। नवरात्र में हर साल की तरह इस बार भी सीएम योगी कठिन उपवास कर रहे थे, लेकिन साथ ही कोरोना से मुकाबला करने में भी जुटे रहे। प्रदेश में कोरोना वायरस के मरीजों के सामने आने के पहले ही योगी ने इस बीमारी से निपटने के लिए रणनीति को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया था।
उपवास के बावजूद वह रोजाना सुबह अफसरों के साथ बैठकें करके हालात की समीक्षा करते रहे। फोन और स्थलीय निरीक्षण से भी जानकारी लेने का सिलसिला जारी रहा। इन सबके बीच 30 मार्च को सुबह राजधानी में बैठक व कई कार्यक्रम निपटाने के बाद वह नोएडा के दौरे पर निकल गए। नोएडा में एरियल सर्वे किया और बैठकों को दौर देर रात तक जारी रहा।
पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 31 मार्च को वह सुबह गाजियाबाद निकले और अस्पतालों का मुआयना किया। लेकिन इसी बीच जब टीवी पर तब्लीगी जमात का मसला आ गया तो सभी कार्यक्रमों को रद्द कर योगी ने लखनऊ में एक बड़ी बैठक बुला ली।
गाजियाबाद से लखनऊ पहुंचते ही उच्चस्तरीय बैठक कर उन्होंने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए अफसरों को जरूरी हिदायतें दीं। यह सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है।