प्रदेश के विभिन्न निगमों, उपक्रमों, परिषदों, आयोगों और संस्थाओं में नियुक्त गैर सरकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और सलाहकारों को सरकारी आवास आवंटित किया जा सकेगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य संपत्ति विकास के नियंत्रणाधीन भवनों का आवंटन (संशोधन) विधेयक 2020 के मसौदे को मंजूरी दे दी गई।
यह विधेयक अब विधानमंडल में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक संशोधन विधेयक पास होने के बाद सरकार के विभिन्न निगमों, उपक्रमों, परिषदों, आयोगों एवं संस्थाओं में नियुक्त गैर सरकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और सलाहकारों को आवास आवंटन किया जा सकेगा।
आवास आवंटन के संबंध में उच्चतम न्यायालय के 10 अक्तूबर, 2018 के निर्णय के पालन के लिए ‘न्यास’ को भवन आवंटन एवं उसके नवीनीकरण की अवधि को संशोधित किया जाएगा। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के 7 मई, 2018 के आदेश के तहत भविष्य में उत्तर प्रदेश में किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को जीवनपर्यंत सरकारी आवास आवंटित नहीं किया जाएगा।
मंडी परिषद अपनी आय की 4 प्रतिशत राशि अब चैरिटेबल संस्थाओं को वित्तीय सहायता के तौर पर दे सकेगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम, 1964 में संशोधन के निर्णय पर मंगलवार को कैबिनेट ने मुहर लगा दी। उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम, 1964 की धारा 17-क(1)(क) और धारा-19(3)(11-क) में संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया था।
निराश्रित गोवंश को आश्रय प्रदान करने वाली संस्थाओं को सहायता प्रदान करने के लिए धारा-19 में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया था। इस धारा के तहत चैरिटेबल संस्थाओं को मंडी समितियों की कुल आय में से दो प्रतिशत वित्तीय सहायता की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया है।
इसके अलावा मंडी अधिनियम की धारा-17 में यह भी व्यवस्था थी कि मंडी शुल्क (विकास सेस को छोड़कर) छूट प्रदान कर सकती है या उसकी दर में कमी कर सकती है। छूट के प्रकरणों में एकरूपता लाने के लिए ‘या उसकी दर में कमी कर सकती है’ को विलोपित किया गया है।
नोएडा में विकास प्राधिकरण की ओर से सेक्टर 108 में बनवाए गए ट्रैफिक पार्क में गौतमबुद्धनगर पुलिस आयुक्त का कार्यालय बनेगा। कैबिनेट ने मंगलवार को ट्रैफिक पार्क की बिल्डिंग को अस्थायी रूप से पुलिस विभाग को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। साथ ही मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्राधिकरण को 76.96 लाख रुपये देने को भी मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यह भवन पुलिस विभाग को अस्थायी रूप से हस्तांतरित किया जा रहा है। औद्योगिक विकास विभाग की शर्तों के मुताबिक ट्रैफिक पार्क के मूल स्वरूप और उसके उद्देश्य में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इस भवन को पुलिस विभाग को स्थाई रूप से हस्तांतरित करने के लिए प्राधिकरण ने 34 करोड़ रुपये की मांग रखी थी। लेकिन गृह विभाग ने इतनी रकम देना मुनासिब नहीं समझा।