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जंगल गर्ल की कहानी पर डबल्यूडबल्यूएफ ने की जांच, सामने आई ये रिपोर्ट

Thu, 13 Apr 2017 02:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहराइच
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मोगली गर्ल के नाम से चर्च‌ित हुई बच्ची
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बहराइच के कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मोतीपुर रेंज में हाईवे के किनारे जनवरी में लहूलुहान हालत में मिली बालिका को कुछ लोगों ने मोगली गर्ल, जंगल गर्ल का नाम दे दिया था। बाद में उसके परिवारीजन सामने आ गए। फिर भी लोग अपने तर्क पर अड़े रहे। 
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इस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड फार नेचर) ने जांच शुरू की थी। जांच में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी ने भी जंगल गर्ल की थ्योरी को नकार दिया है। 

मामले में संबंधित अधिकारियों का बयान दर्ज कर जांच अधिकारी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी ने रिपोर्ट दिल्ली हेड क्वार्टर को भेज दी है।

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज में जनवरी में हाईवे के निकट एक बालिका मिली थी। जहां पर बालिका मिली थी उसी जगह से कुछ दूरी पर वन विभाग की खपरा चौकी स्थित है। 
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ग्रामीणों व वन विभाग की सूचना पर पहुंची मोतीपुर पुलिस ने लहूलुहान बालिका को सीएचसी पहुंचाकर भर्ती कराया था। वहां से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सवा दो महीने तक बालिका जिला अस्पताल में भर्ती रही। इसके बाद अचानक वह मोगली गर्ल और जंगल गर्ल के नाम से चर्चा में आ गई। 
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डीएफओ ने भी कहानी को बताया मनगढ़ंत

अस्पताल में खाना खाती बच्ची
इस बीच डीएफओ ने बालिका के मोगली गर्ल होने की बात से इंकार करते हुए मामले को मनगढ़ंत बताया था। 

तीन दिन पूर्व बालिका जब न्यायालय बाल कल्याण समिति के आदेश पर लखनऊ स्थित निर्वाण सेंटर भेजी गई, तो उसी दिन जौनपुर निवासी उसके परिवारीजन सामने आ गए। हालांकि इस बीच विदेशी मीडिया ने भी बालिका को मोगली गर्ल के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित कर दिया। 

इस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड फार नेचर) के अधिकारी भी हरकत में आए। मामले में वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन को जांच सौंपी गई। जांच अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि सप्ताह भर तक सभी तथ्यों को खंगाला गया, पर मोगली गर्ल या जंगल गर्ल जैसा कुछ भी नहीं मिला। 

जौनपुर निवासी अलीजा जांच में सिर्फ मानसिक रूप से कमजोर मिली। सीएमओ डॉ. अरुणलाल ने बातचीत में स्वीकार किया कि वह मानसिक कमजोर है। वहीं मोतीपुर थाने के इंस्पेक्टर रामअवतार यादव और सिपाही सर्वजीत यादव ने बयान में कहा है कि बालिका के बंदरों के बीच रहन-सहन का पता नहीं चला है। 

वह सड़क के किनारे घायल हालत में मिली थी। उधर सीएमएस डॉ. डीके सिंह बताया कि बालिका जब आई थी, तब काफी कमजोर थी। इसके चलते वह चल नहीं पा रही थी। परियोजनाधिकारी ने बताया कि सभी संबंधित के बयान दर्ज कर रिपोर्ट दिल्ली हेड क्वार्टर भेज दी गई है।

रिटायर्ड आईपीएस कर रहे अध्ययन
परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि मोगली गर्ल उर्फ जंगल गर्ल उर्फ वनदुर्गा उर्फ अलीजा के मामले में एक रिटायर्ड आईपीएस भी अध्ययन कर रहे हैं। वह वनों पर आधारित रहन-सहन के मामलों के विशेषज्ञ भी हैं। तीन दिन में रिपोर्ट आएगी।  इसके बाद आईपीएस के नाम का खुलासा किया जाएगा।
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