आलापुर(अंबेडकरनगर)। राजेसुल्तानपुर स्थित कालिका माता मंदिर परिसर में शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के बीच कालिका पुराण की कथा का वर्णन किया गया।
प्रवाचक सूबेदार पंडित शिव प्रताप दुबे ने मां कालिका के स्वरूप, शक्ति और महिमा का विस्तार से वर्णन किया। भजन, श्लोक और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत कथा को श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि मां कालिका सृष्टि की रक्षा, धर्म की स्थापना और अन्याय के अंत का प्रतीक हैं। कालिका पुराण के प्रसंगों के जरिए बताया गया कि जब समाज में अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब देवी अपने स्वरूप से संतुलन स्थापित करती हैं। मां कालिका के उग्र और करुण दोनों स्वरूपों का उल्लेख किया गया। प्रवाचक ने कहा कि सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन में आत्मविश्वास और धैर्य मिलता है। कालिका पुराण का श्रवण व्यक्ति को सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है। यज्ञाचार्य पंडित संजय शुक्ला के सान्निध्य में प्रतिदिन विधि-विधान से हवन-पूजन कराया जा रहा है। कथा के समापन के बाद आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इसमें महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने सहभाग किया।