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विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस आज : कॉस्मेटिक क्रीम व बालों में डाई लगाकर धूप में न निकलें

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विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस आज : कॉस्मेटिक क्रीम व बालों में डाई लगाकर धूप में न निकलें
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लखनऊ में अगर मार्च से जून के बीच आप सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे के बीच खुले में निकल रहे हैं तो खुद को धूप से बचाएं।
खासतौर पर कॉस्मेटिक क्रीम लगाने और बालों में डाई लगाने वाले लोगों के लिए पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आना खतरनाक हो सकता है। यह तथ्य इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है।
आईआईटीआर की फोटो बायोलॉजी डिवीजन के वरिष्ठ प्रमुख वैज्ञानिक और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड्स (बीआईएस) के सदस्य डॉ. रतन सिंह राय की टीम ने पराबैंगनी किरणों के प्रभाव पर अध्ययन किया है।
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डॉ. राय का कहना है कि लगातार पराबैंगनी किरणों की मौजूदगी का डाटा जुटाया जा रहा है। डाटा से यह पता चला है कि गर्मियों के दिनों में पराबैंगनी किरणों की मौजूदगी सबसे अधिक बनी हुई है।
इन किरणों का जब प्रभाव देखा गया तो पता चला है कि कॉस्मेटिक और हेयर डाई में मौजूद रसायनों के साथ रिएक्शन हो रहा है।
इसका लोगों की त्वचा पर जहां गंभीर असर हो सकता है, वहीं फील्ड में काम करने वाले लोगों के डीएनए में भी दिक्कत पैदा कर सकता है। त्वचा पर लाल चकते पड़ने के अलावा फफोले जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
ओजोन परत के कमजोर होने का असर संभव
डॉ. राय का कहना है कि पराबैंगनी विकरण से बचाने का काम ओजोन लेयर करती है। इसके अलग-अलग भाग का काम अलग-अलग होता है। कमजोर परत की वजह से पराबैंगनी किरणों का असर बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह और खतरनाक हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले प्रदूषण की मात्रा को कम करने पर काम करना होगा।
डाई लगाकर धूप में न सुखाएं
डॉ. राय का कहना है कि बहुत लोगों में आदत होती है कि हेयर डाई लगाने के बाद धूप में बैठकर उसे सुखाते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करें। पराबैंगनी विकरण की मौजूदगी इसके गंभीर नुकसान पैदा कर सकती है।
धूप वाले चश्मे, छाता और हैट लगाएं
लोगों को नुकसान पहुंचाने वाले तथ्य सामने आने के बाद अब आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने फोटो बायोलॉजी डिवीजन की टीम को लोगों को जागरूक करने के लिए कहा है। टीम अब लोगों को बता रही है कि पराबैंगनी विकरण से बचने के लिए सुबह 11 बजे से तीन बजे के बीच आंखों पर यूवी प्रोटेक्टेड धूप के चश्मे, छाता या हैट का उपयोग करें। पूरी बांह के कपड़े पहनें जिससे अधिकांश शरीर ढंका रहे। अपने आसपास हरियाली बढ़ाएं। इससे भी पराबैंगनी विकरण का असर कम होगा।
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प्लास्टिक जलाने से ओजोन को नुकसान
यूपीपीसीबी के पूर्व मुख्य पर्यावरण अधिकारी कुलदीप मिश्र का कहना है कि लखनऊ में रोजाना करीब 50 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। इसे मानकों के उलट निस्तारित किया जाता है। कई बार तो इसे जला दिया जाता है। इससे खतरनाक गैस वायुमंडल में मिलती हैं। इससे होने वाला असर ओजोन की परत के लिए भी नुकसानदेह है। अभी जरूरत है कि प्लास्टिक कचरे के रीयूज को बढ़ाया जाए। वहीं सही तरीके से इसे बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए निस्तारित किया जाए। वाहन से अत्यधिक धुआं उत्सर्जन को रोका जाए। प्लास्टिक व रबर से बने टायर न जलाएं। अधिक से अधिक पौधे लगाएं, ताकि ऑक्सीजन की अधिक मात्रा बनी रहे और ओजोन अणुओं का निर्माण होता रहे।
ये भी हो सकती है परेशानी
डीएनए में बदलाव से इम्यून सिस्टम कमजोर, त्वचा रोग, अस्थमा, आंख के कार्निया में सूजन।
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