जिस जहरीली हवा में हम सांस ले रहे हैं, वह हमारे दिल को बीमार बना रही है। हाल के दिनों में युवाओं में बढ़ रहे हार्ट अटैक और कम उम्र में मौतों के बढ़ते मामले चौंकाने वाले हैं। हवा में मौजूद जहरीले कण व अन्य रसायन सांसों के जरिये खून में मिलकर दिल को उतना ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। जितना हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन और अनियंत्रित डायबिटीज पहुंचाती है। तनाव और खराब लाइफस्टाइल इसमें आग में घी का काम कर रहे हैं।
अमर उजाला से खास बातचीत में डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि हवा में मौजूद जहरीले पीएम 2.5 कण व अन्य रसायन, सांसों से सीधा हमारे खून में पहुंच कर हमारी संवेदनशील धमनी नलिका की भीतरी परत में सूजन पैदा कर इन्हें भीतर से कमजोर और संकरा बना रहे है।
एक सवाल के जवाब में डॉ. मंजूनाथ ने बताया कि कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव वैक्सीन लगने के छह माह तक ही परिलक्षित होते हैं। कोविड वैक्सीनेशन को चार साल बीत गए। युवाओं में बढ़ रहे हृदयाघात का कोरोना वैक्सीन से दिल पर नुकसान का कोई कनेक्शन नहीं है। यह महज अफवाह है। युवाओं में हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं का ट्रेंड आज नहीं बल्कि पिछले 15 वर्षों से देखने को मिल रहा है।
डॉ. मंजूनाथ ने स्ट्रेस, स्मोकिंग, साल्ट, शूगर, स्पिरिट(अल्कोहल) और सेडेंटरी लाइफ से परहेज करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि रोजाना 45 मिनट का एक्सरसाइज जीवन में 12 से 15 साल का इजाफा करता है। मोबाइल स्क्रीन के साथ ही फास्ट फूड से दूरी हृदय के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अपनों से अपने दिल की बात शेयर करें, वर्ताव ठीक रखें, गुस्सा कम करें।
उन्होंने दिलचस्प अंदाज में कहा कि कार पर आई खरोंच पर हम दूसरों पर चिल्लाते हैं, इससे कार से ज्यादा हमारे दिल को खरोंच पहुंचती है। पहले मां-बाप को उनके बच्चे दिल का इलाज कराने अस्पताल आते थे, अब मां-बाप अपने युवा बच्चों को दिल के इलाज के लिए अस्पताल ला रहे जो दु:खद है।
डॉ. मंजूनाथ ने कर्नाटक में हृदयाघात के मरीजों के लिए 'पहले ट्रीटमेंट-बाद में पेमेंट' योजना चलाई। उनका कहना है कि सरकार की आयुष्मान भारत योजना देश के निर्धन मरीजों के लिए वरदान है, लेकिन इसमें समय समय पर प्रोसीजर आदि के शुल्क में बदलाव जरूरी है, नहीं तो मंहगाई के दौर में आयुष्मान- इंपैनल्ड अच्छे निजी अस्पताल इलाज से हाथ खड़े कर देंगे। सरकार पर काफी बोझ पड़ेगा। निर्धन मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने की जरूरत है और दिल के मरीजों के इलाज के लिए इनमें जिला स्तर पर आईसीयू की सुविधा बढ़ाने की जरूरत है।