डॉ. गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर खिलाड़ियों के साथ यह समस्या ज्यादा आती है। करीब 40 फीसदी खिलाड़ी चोट को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में उनके कॅरिअर पर असर डालने लगती है। इस दौरान लिंब सेंटर की कार्यशाला की ओर से तैयार किए गए विभिन्न उपकरणों की जानकारी दी गई।
ये उपकरण पहले लकड़ी और लोहे से तैयार किए जाते थे। अब उन्हें प्लास्टिक से तैयार किया जा रहा है। प्लास्टिक के उपकरण कम वजनी होने की वजह से ज्यादा आरामदेह हैं।
चोट लगने पर यदि मरीज को उपकरण पहना रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि वह मरीज केलिए कितना आरामदायक है। उपकरण पहनने पर त्वचा में लालपन होने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। उपकरण कहीं से दबाव डाल रहा हो या उसकी वजह से शरीर के दूसरे हिस्से में दर्द हो रहा हो तो भी डॉक्टर और उपकरण बनाने वाले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
- शगुन सिंह, प्रोस्थेटिक ऑर्थोटिक विशेषज्ञ
जूता खरीदते समय यह देख लें कि पंजा फिट बैठ रहा है या नहीं। चौड़े पंजे वाले और अंगुलियों पर दबाव नहीं देने वाले जूते पहनने से पैर व कमर में दर्द नहीं होता है। जूता सुबह और देर शाम नहीं खरीदना चाहिए। जूता खरीदने के लिए दोपहर का वक्त सबसे बेहतर होता है। इस दौरान नाप लेने से उसका आकार सही तरीके से पता चल जाता है। इसी तरह ऊंची एड़ी के जूते पहनने से भी परहेज करना चाहिए। इससे कमर और पैरों में दर्द बढ़ता है। - अरविंद कुमार निगम, सचिव ओपाई