खर्राटे केवल एक आदमी को ही बीमार नहीं बनाते, बल्कि इससे परिवार के दूसरे सदस्य भी मानसिक बीमारी के शिकार होते हैं।
खर्राटे का इलाज होम्योपैथिक विधियों से संभव है। यह जानकारी शुक्रवार को शैक्षिक होम्योपैथिक कार्यशाला में गांधी भवन में दी गई।
हैनिमैनियन एजूकेशन एवं रिसर्च फोरम द्वारा आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन होम्योपैथ डॉ. दीदार सिंह ने कहा कि खर्राटे जैसी बीमारी के कारण आदमी गंभीर मरीज बन सकता है।
खुद के मानसिक रोगी बनने के साथ नाक से स्त्राव और लगातार खर्राटों से मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। परिवार के सदस्य भी खर्राटों से परेशान मानसिक रोगी बनने लगते हैं।
इसका सही तरीके से इलाज किया जाए तो समस्या से छुटकारा संभव है। परेशानी दूर करने के लिए उन्होंने होम्यापैथिक विधियों के बारे में भी बताया।
डॉ. सिंह ने बताया कि मनोरोग मरीजों का भी इलाज होम्योपैथी से किया जा रहा है। इसके अलावा कैंसर, मन्दबुद्धिता, सेरीब्रल पाल्सी, अंधापन (जन्म से) गूंगापन (जन्म से), बहरापन (जन्म से) का इलाज संभव हो सका है।
एक्यूट बीमारियां जैसे निमोनिया, तेज बुखार, इंसेफेलाइटिस का इलाज भी अब हो पा रहा है।
दिल्ली से आए होम्योपैथ डॉ. कमल मलिक ने ठोस धातुओं से बनने वाली औषधियों के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि हर धातु के अपने गुण होते हैं।
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को ये औषधियां दी जाती हैं। जैसे-प्लैटिनम से बनी औषधि प्लैटिनम मटालिकम। इसी प्रकार आरममटैलिकम सोने से बनी औषधि है एवं फेरम मेटलिकम लोहे से बनी औषधि है।
इस प्रकार की औषधियों को मुख्य रूप से बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले मजबूत इरादे वाले लोगों को दिया जाता है। कार्यशाला में कई राज्यों से आए प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया।
इस दौरान लुधियाना से डॉ. रवतेज इंद्रजीत कौर मावी, डॉ. गगनदीप सिंह, जालंधर से डॉ. अवतार सिंह मावी, डॉ. रविन्द्र सिंह और आयोजक डॉ. अमलेंदु त्रिपाठी मौजूद रहे।