एलोवेरा एक औषधीय पौधा है जिसका घाव भरने, त्वचा रोगों व पेट की बेहतरी के
लिए उपयोग किया जाता है।
इसे डायबिटीज, दमा, मिर्गी, आस्टियोआर्थराइटिस व
अन्य रोगों के उपचार में भी प्रयोग किया जाता है। लोशन जैसे कॉस्मेटिक
उत्पाद की भी मांग बढ़ी है।
यह एक लघु उद्योग के तौर पर सामने आया है। यह
जानकारी वैज्ञानिकों ने मंगलवार को सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड
एरोमैटिक प्लांट (सीएसआईआर-सीमैप) में आयोजित चार दिवसीय एलोवेरा
प्रसंस्करण तकनीकी पर उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यशाला में दी।
वैज्ञानिकों
ने बताया कि एलोवेरा के चिकित्सीय गुण बरकरार बनाए रखने के लिए उचित
प्रसंस्करण प्रक्रिया अपनाए जाने की जरूरत है।
कोर्स कोआर्डिनेटर व प्रधान
वैज्ञानिक सुदीप टंडन ने बताया कि यह प्रशिक्षण एलोवेरा जूस के उत्पादन के
प्रत्येक चरण की जानकारी देगा और इसमें प्रतिभागियों को प्रायोगिक जानकारी
भी दी जाएगी।
साथ ही साथ इसके उत्पादन से जुड़ी मशीनरी, आय व्यय बताने के
साथ प्रशिक्षणार्थियों को अपने हाथों से एलोवेरा व जूस आदि बनाने पर जोर
दिया जाएगा।
इसमें वे उद्यमी भाग ले रहे हैं जोकि एलोवेरा के प्रसंस्करण पर
खुद की इकाई लगाना चाहते हैं।
इसके कर्नाटक, गुजरात, आंध्रप्रदेश, बिहार,
राजस्थान, उत्तराखंड और यूपी से तीन महिलाओं सहित 17 युवा उद्यमी हिस्सा ले
रहे हैं।